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परेशानी:मक्का पर अमेरिकी ‘फॉल आर्मी वर्म’ का अटैक, 45 सौ हेक्टेयर में लगी फसल के नुकसान की है आशंका

डुमरांव6 महीने पहले
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  • कृषि वैज्ञानिकों को हुई टेंशन, किसानों में दहशत, जिले में पहली बार बेहद खतरनाक अमेरिकी कीटों का हमला
  • मक्का की फसलों के लिए कोरोना जैसे बीमारी से भी ज्यादा डेंजर है फॉल आर्मी वर्म

(अरविंद चौबे) सिमरी प्रखंड के चकनी सहित अन्य कुछ भागों में फॉल आर्मी वर्म व स्पोडोप्टेरा फ्रूगीपेर्डा नामक विदेशी कीट पाए जाने से कृषि वैज्ञानिक सकते में हैं। वहीं जिले के किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले के वीर कुवंर सिंह कृषि कॉलेज के वैज्ञानिकों में हडकंप मच गया। सूचना मिलते ही कृषि कॉलेज प्राचार्य डाॅ. अजय कुमार सिंह, डाॅ. चन्द्रशेखर प्रभाकर, डाॅ. एके जैन समेत कई किसान गुरुवार को चकनी गांव स्थित मनीष राम के खेत में पहुंचे जहां स्थिति का जायजा लिया। जिसके बाद वैज्ञानिकों ने विभिन्न प्रकार की दवा की छिड़काव करने की सलाह दी।

कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. अजय कुमार ने कहा कि यह कीट मक्का के लिए कोरोना से भी खतरनाक है। यह विदेशी कीट पलक झपकते ही पूरे खेत चट कर जाते हैं। पहली बार यह वर्ष 2018 में इंडिया में आया था। जिसे दक्षिण भारत में देखा गया था। उसके बाद 2019 में पूर्णियां व किशनगंज जिले में पाया गया था। इस कीट को लेकर जिला प्रशासन को एडवायजरी भेज दी गई है। बक्सर जिला में 4500 हेक्टेयर में मक्का की खेती होती है। जिनमें अधिकांश खेत डुमरांव अनुमंडल के उसी गंगा दियारा इलाके में हैं। जहां यह किट पाया गया है।

अगर इस पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो पूरी फसल बर्बाद कर देगा। वहीं इस पर शोध कर रहे कृषि वैज्ञानिक डाॅ. चन्द्रशेखर प्रभाकर ने कहा कि चकनी गांव में मक्के की फसल सूखती देख किसानों ने स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो जांच में पाया गया कि हरे तथा भूरे रंग के कीट की वजह से यह नुकसान हो रहा है।

शोध करने पर आर्मी वर्म नामक विदेशी कीट के रूप में पहचान हुई। इसका तेजी से विस्तार होता है। यह 24 घंटे में करीब 250 किमी का सफर कर सकता है और उतनी ही तेजी से अपने खानदान का विस्तार कर सकता है। यह यह फसल को ऐसा बर्बाद करता है जैसे लगता हो कोई जानवर खाया हो। इसमें मनीष राम के अलावे सूर्य, पंकज , सुरज, गिरीश बिहारी, बृज विहारी, राम सागर व प्रेमसागर मौजूद थे।
आयात या उड़कर भारत पहुंचने की आशंका: कृषि वैज्ञानिक डाॅ. एके जैन से बताया कि अफ्रीका से अनाज के आयात के क्रम में इसके वर्ष 2018 में भारत पहुंचने की आशंका है। यह भी संभव है कि कीट का झुंड खुद उड़कर आ गया हो। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि सबसे पहले कर्नाटक के चिक्काबालापुर जिले में आर्मी वर्म पाया गया। इसने यहां की 70 फीसदी ज्वार की फसल को अपना निशाना बनाया और सब्जियों तक पहुंच गया। वर्ष 2018 में ही ओडिशा के कुछ जिलों में यह कीट पाया गया था। समय रहते रोकथाम भी की गई थी।

अफ्रीकी महाद्वीप में मचा चुका है तबाही

वीर कुवंर सिंह कृषि महाविद्यालय डुमरांव के वैज्ञानिक सह कीट विज्ञान पर शोधकर्ता डाॅ. चन्द्रशेखर प्रभाकर के अनुसार दो साल पहले अफ्रीकी महाद्वीप में एक कीट फसलों को चट कर गई थी। अंग्रेजी में आर्मी वर्म (वैज्ञानिक नाम: स्पोडोप्टेरा फ्रूजीपेर्डा) नामक इस कीट का मुख्य भोजन मक्का की फसल है। छोटे आकार के इस कीट का आहार कम होता है, लेकिन यह इतनी तेजी से अपनी आबादी बढ़ाते हैं कि देखते ही देखते पूरा खेत साफ कर सकते हैं। मादा कीड़ा तीन से चार दिन में सैकड़ों अंडे दे सकती है। मुख्य तौर पर अमेरिका में पाए जाने वाले आर्मी वर्म के बारे में कहा जाता है कि यह 2016 में नाइजीरिया पहुंचा। कुछ ही समय में अफ्रीका के 44 देशों में फैल गया। पिछले दो वर्ष में अफ्रीका में ज्वार, सोयाबीन आदि फसल नष्ट होने से अरबों पाउंड का नुकसान हो चुका है।
इन रसायनों के छिड़काव से रोकथाम संभव: कृषि कॉलेज डुमरांव के वैज्ञानिक डाॅ. चन्द्रशेखर प्रभाकर ने कहा कि फॉल आर्मी वार्म या स्पोडोप्टेरा फ्रूगीपेर्डा मक्का की खेती को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसके बचाव के लिए किसानों को स्पिनेटोरम 11.7 फीसदी 0.5 लीटर पानी या लम्बडा सायहेलोथ्रीन 9.5 फीसदी प्लस थाएमेथोक्जाम 12.5 फीसदी 0.25लीटर पानी या कालोरंतरानिलीप्रोले 18.5 फीसदी एसी को 0.4 लीटर पानी में घोल का पौधा पर छिड़काव करें। खेतों में निगरानी के लिए फॉल आर्मी वर्म के गंध फंदा का उपयोग किया सकता है। वैज्ञानिकों के द्वारा फेरोमोन ट्रप को किसानों के खेत में फॉल आर्मी वार्म के निगरानी के लिए लगाया गया एवं इस ल्यूर को किसानों के बीच बांटा गया।

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