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आस्था:भारतीय संस्कृति में आदर्श नारीत्व व लोक आस्था का प्रतीक पर्व वट सावित्री व्रत 10 जून को मनेगा

डुमरांव16 दिन पहले
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  • बरगद के वृक्ष की पूजा कर सुहागन महिलाएं मांगती है पति को लंबी उम्र और स्वास्थ्य का आशीर्वाद

भारतीय संस्कृति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। लोक आस्था का पर्व वट सावित्री गुरूवार को मनाया जाएगा। हर वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही इस व्रत को मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाओं में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। हर साल देश भर में हिंदू महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य के लिए वट सावित्री पूजा के अवसर पर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और व्रत

रखती हैं। ज्योतिषाचार्य पंड़ित नरोत्तम द्विवेदी ने कहा कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह त्योहार हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस वर्ष वट सावित्री 10 जून, दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। पंचांग के मुताबिक अमावस्या तिथि 9 जून को दोपहर 01ः12 से शुरु होकर 10 जून अपराह्न 03ः16 बजे तक अमावस्या तिथि भोग करेगी।

महिलाएं पति को लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं : ज्योतिषाचार्ज पंड़ित नरोत्तम द्विवेदी ने बताया कि वट सावित्री व्रत दिवस सावित्री की बहादुरी को याद करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने अपने पति सत्यवान को वापस लाने के लिए यमराज से लड़ाई लड़ी थी। इसलिए इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और वट सावित्री से अपने पति को लंबी उम्र और स्वास्थ्य का आशीर्वाद देने की प्रार्थना करती हैं। हालांकि उत्तर भारत में यह व्रत अमावस्या को मनाया जाता है। लेकिन दक्षिण भारत में वैशाख के महीने में पूर्णिमा (पूर्णिमा के दिन) को भी यही त्योहार मनाया जाता है। उत्तर भारत में यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है।

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