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नहीं हुआ विकास:महरौरा गांव के विकास को संघर्ष कर रहे हैं ग्रामीण, सात निश्चय योजना भी नहीं पहुंची

डुमरांव10 दिन पहले
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  • आजादी के 74 साल में 64 साल तक यह गांव न पंचायत न नप में शामिल था

अजादी के 74 साल बाद भी महरौरा गांव कि स्थिति में सुधार नही हुआ है। यह बिहार का इकलौता गांव है जहां के लोग 64 साल तक सिर्फ विधानसभा व लोक सभा में मतदान किया। यह गांव न तो नप क्षेत्र में था और ना ही पंचायत में अपने गांव के विकास के लिए ग्रामीणों ने लम्बे लड़ाई लड़ी। जिसके बाद 64 साल बाद पंचायत में जुड़ा। इस गांव में 90 फीसदी से अधिक दलित निवास करते है।

यहां लोग जिल्लत भरी जिंदगी से निजात के लिए कई बार पदाधिकारियों को सूचना दी गई। परन्तु कोई निदान नही निकला। जिसको आक्रोश है कन्हैया राजभर कहते है कि मुख्यमंत्री का सात निश्चय योजना पुरी तरह से विफल है। हमारे गांव में घरों से निकलने वाला पानी गलियों में जमा हो रहा है। जिससे घरों से निकलना मुश्किल हो गया।

इसको लेकर कई बार शिकायत की गई परन्तु कोई सुनवाई नही हो रही है। जिसके बाद अंततः यही निर्णय हुआ कि हमारा पुरा गांव एसडीओ से मिलकर इसकी अंतिम सूचना देगें। अगर फिर भी कोई उपाय नही किया गया तो आंदोलन किया जायेगा। महेन्द्र राम कहते है भारत आजादी 1947 में हुआ लेकिन हमारी गांव की आजादी 2011 में हुई वो भी इसके लिए कितनी लड़ाई लड़ी गई।

आजादी तो मिली परन्तु ग्रामीण आज भी जिल्लत भरी जिंदगी जीने को मजबूर है। महेन्द्र राम ने बताया कि वर्ष 2011 में कुशलपुर पंचायत में शामिल किया था। इसके पहले हमारा गांव न तो नगर परिषद में था नाही पंचायत में हमारे गांव के लोग लोकसभा व विधानसभा में तो वोट करते थे। परन्तु पंचायत में पहली बार 2016 में किये है।

जबकि नगर परिषद कार्यालय व प्रखंड कार्यालय एक किलोमीटर पर स्थित गांव स्थित है। उसके बावजूद प्रशासन व सरकार ने हमें कहीं नही रखा था। जब रखा भी तो हम वहीं है जहां 64 साल पहले थे। 2018 गुजरने को है लेकिन एक भी गांव में इंदिरा आवास व प्रधानमंत्री योजना से आवास नही है।

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