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  • Women Have Been Dominant In The History Of Dumraon, Since Independence, Women Have A Lot Of Interest In Development And Politics.

हर ओर नारी शक्ति:डुमरांव के इतिहास में महिलाओं का रहा है दबदबा, आजादी के पहले से ही विकास व राजनीति में महिलाओं की रुचि काफी रही

डुमरांव9 महीने पहले
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  • आजादी के पहले से ही विकास व राजनीति में महिलाओं की रुचित काफी रही है

भले ही सरकार आज महिलाओं की पंचायत व सरकारी नौकरी में 33 फिसदी आरक्षण देकर समाज में उन्हें बराबरी का हक दिला रही है। वहीं इससे ठीक उल्टे डुमरांव अनुमंडल में महिलाओं के द्वारा घुंघट के जमाने में भी अनुमंडल ही नहीं बिहार व यूपी के कई इलाकों में विकास के लिए पुरूषों से आगे रही है। विकास और राजनीति में काफी पुरानी रूची है।

जिसमें खास तौर से नप चुनाव में तो इनका दबदबा काफी है। नगर परिषद डुमरांव में पहले से ही महिलाओं को सम्मान मिलता आया है। पहली बार डुमरांव के सर्वाधिक चर्चित कांग्रेसी नेता स्व. द्वारिका प्रसाद केशरी की पत्नी मीरा देवी चेयरमैन चुनी गई। वहीं भारत के आजादी के पहले ही शिक्षा के क्षेत्र में एक तरफ डुमरी के धरीक्षण कुवंरी ने आजादी के पहले ही दर्जनों प्राथमिक विद्यालय, एक हाई स्कूल, दो काॅलेज का निर्माण कराया। इसके साथ कुआं, तलाब, कोईलवर में टीवी अस्पताल के अलावे दर्जनों मंदिर क निर्माण कराया। धर्म के साथ शिक्षा का अलख-गांव में जलाया।

स्वास्थ क्षेत्र में कई हम कार्य किए। उनके बारे में व्यक्तित्व एवं कृतित्व बारे में कहा कि अनपढ़ रहते हुए भी धरीक्षणा कुंवरी ने क्षेत्र में शिक्षा का अलख जलाने का कायम किया है। जानकारों के अनुसार पूरे शाहाबाद में शिक्षा की अलख जलाने के कारण धरीक्षणा कुंवरी का नाम विकास महिला या शिक्षा के देवी के रूप में प्रसिद्ध था। धरीक्षणा कुंवरी ने अपना सारा धन समाज के हित में दान करने का काम किया है।

इसका जागता मिशाल केपी उच्च विद्यालय डुमरी, डीके मेमोरियल काॅलेज डुमरी, डीके काॅलेज डुमरांव, बक्सर स्थित बालिका विद्यालय, कोईलवर स्थित अस्पताल में रोगी कल्याण वार्ड, बीएचयू में छात्र कल्याण कोष की स्थापना में योगदान एवं बक्सर स्थित पोस्टमार्टम हाउस का निर्माण के 50 से अधिक धर्मशाला कुआं व तलाब का निर्माण आदि कराया है।

जबकि वहीं डुमरांव राज परिवार के महारानी उषा रानी ने महिला विद्यालय खोलकर छात्राओं के लिए शिक्षा की अलख जगाई। आधी अबादी का आजादी से पहले से ही विकास और राजनीति का दबदबा है। पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर चली है। लेकिन आजाद भारत में जो सम्मान सरकार के द्वारा उन्हें मिलना चाहिए आज तक नही मिला।

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