हत्या के विरोध में आक्रोश:शादी की नौवीं सालगिरह पर नीरज मुखिया की हत्या, एक साल में परिवार में तीन माैत

फुलवारीशरीफएक महीने पहले
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घटना के बाद लोगों की जुटी भीड़ और उन्हें समझाते स्थानीय जनप्रतिनिधि। - Dainik Bhaskar
घटना के बाद लोगों की जुटी भीड़ और उन्हें समझाते स्थानीय जनप्रतिनिधि।

14 दिसंबर 2012 काे रामपुर-फरीदपुर के मुखिया नीरज कुमार की दानापुर की रहने वाली रूपा से शादी हुई थी। मंगलवार काे उनके शादी की नौवीं सालगिरह थी। उन्हें ग्रामीण और समर्थक शादी की मुबारकबाद दे रहे थे। बिना नाश्ता किए वे घर से अपने ऑफिस के लिए निकले थे। थाेड़ी देर ही ऑफिस में थे कि तीन अपराधी वहां आ धमके और उनपर गाेलियाें की बाैछार कर हत्या कर दी। सूचना मिलने के बाद घर से लेकर पंचायत मे काेहराम मच गया।

मुखिया, उनके पिता और साले की एक साल में हुई माैत
मुखिया नीरज कुमार के अलावा उनके परिवार में एक साल में उनके पिता सूर्यकांत सिंह और साले सतीश कुमार की माैत हाे गई। काेराेना की दूसरी लहर में एक साल पहले सूर्यकांत सिंह की माैत हाे गई वहीं इसी साल 17 नवंबर काे उनके साले सतीश की सड़क दुघर्टना में जान चली गई। 17 नवंबर काे जब नीरज चुनाव जीते थे उस दिन वे बाइक से उन्हें बधाई देने के लिए फुलवारीशरीफ हाईस्कूल आ रहे थे। इसी दाैरान सड़क दुर्घटना में उनकी माैत हाे गई।

पालीगंज से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में थे
नीरज की राजनीतिक सफर 2010 से शुरू हुई थी। वह सबसे पहले पंचायत समिति के सदस्य के तौर पर जीते। उसके बाद 2015 और 2021 में मुखिया के पद पर जीते। इसके अलावे वह पालीगंज से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। चार दिन पहले ही नीरज ने भास्कर को बताया था कि शपथ ग्रहण होने के बाद पालीगंज आया-जाया करेगें। वहीं से अगली बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। नीरज इतने सहज ,कर्मठ और ईमानदार थे कि शिवाला से लेकर पसीह से आगे तक की सारी दुकानें बंद थीं। उनका कुशल व्यवहार था। उनकी हत्या के बाद गांव में चूल्हा तक नहीं जला।

मुख्यमंत्री को घटनास्थल पर बुलाने की मांग
मुखिया के सर्मथकों ने शव को कार्यालय के पास रखकर मुख्यमंत्री को घटनास्थल पर बुलाने की मांग कर रहे थे। सर्मथकों का कहना था कि प्लानिंग से कुशवाहा जाति के जनप्रतिनिधियों की हत्या की जा रही है। हाल ही में नौबतपुर के लोदीपुर में एक वार्ड सदस्य की हत्या कर दी गयी थी वह भी कुशवाहा जाति से थे। ग्रामीणाें मांग की है कि अपराधियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी हाे। स्पीडी ट्रायल कराकर सजा दिलाई जाए।

मां पागल की तरह रोड पर दौड़ती रही
मां उषा देवी बेटे नीरज की हत्या के बाद पागल की तरह रोड पर दौड़ रही थीं। बहु रूपा को देख दहाड़ मारकर राेने लगीं। मुखिया की हत्या के बाद नेताओं का तांता लगा रहा। पंचायत राज मंत्री सम्राट चौधरी, विधान पार्षद सीपी सिंह, स्थानीय विधायक गोपाल रविदास, दीनानाथ क्रांति, सत्येंद्र, प्रवीण कुशवाहा के अलावा फुलवारी प्रखंड के कई मुखिया और जन प्रतिनिधि वहां पहुंचे और शोक व्यक्त किया। अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष शंकर मेहता ने शोक जताया।

60 घंटे में दाे मुखिया और एक वार्ड सदस्य समेत 5 की हत्या
जिला में चुनावी रंजिश में नव निर्वाचित जनप्रतिनिधियाें की हत्याओं की घटना थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले 60 घंटे में पटना जिले में दाे मुखिया और एक वार्ड सदस्य समेत पांच की हत्या हाे गई। 11 दिसंबर की रात काे पंडारक के मुखिया समेत तीन की हत्या हुई। पंडारक पूर्वी के नव निर्वाचित मुखिया प्रियरंजन उर्फ गाेरेलाल की हत्या कर दी। 11 दिसंबर की रात काे ही नाैबतपुर के जमालपुर पंचायक के वार्ड 9 के नवनिर्वाचित वार्ड सदस्य संजय वर्मा की गाेली मारकर हत्या कर दी गई। 14 दिसंबर को जानीपुर थाना के रामपुर-फरीदपुर पंचायत से दूसरी बार मुखिया चुने गए नीरज कुमार काे अपराधियाें ने गाेलियाें से भून डाला।

राजनैतिक कारणों से बिहार में सबसे अधिक हुई हत्या
शशि सागर की रिपोर्ट बिहार में साल 2021 में अक्टूबर महीने तक 2378 हत्याएं हो चुकी थीं। वहीं, पटना में 157 हत्या हो चुकी हैं। पटना में औसतन 15 हत्याएं हर महीने होती हैं। हाल में हत्या की तीन वारदात राजनैतिक कारणों से हुए हैं। कुछ महीने पहले एनसीआरबी ने साल 2020 का आंकड़ा जारी किया था।

एनसीआरबी के आंकड़ों की मानें तो देश के 28 राज्यों में राजनैतिक कारणों से सबसे अधिक हत्या बिहार में हुई है। बिहार में साल 2020 में राजनैतिक कारणों से 16 हत्याएं हुई हैं। साल 2019 में राजनैतिक कारणों से सबसे अधिक पश्चिम बंगाल में 12 हत्याएं हुई थीं।

तब बिहार में राजनैतिक कारणों से 6 हत्या हुई थीं। साल 2020 में बिहार के बाद झारखंड में राजनैतिक वजह से सात हत्याएं हुईं। वहीं आंध्र प्रदेश में छह हत्याएं हुई। एनसीआरबी की ही रिपोर्ट कहती है कि जातीय हिंसा भी बिहार में ही सबसे अधिक होती हैं।