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अनदेखी:66 पंचायत के 3 लाख 82 हजार लोग प्रभावित लोगों अस्थायी शरण स्थल बनाकर रहने को विवश

गोपालगंज2 महीने पहले
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  • कभी स्टेशन पर रहती थी यात्रियों की भीड़,आज बाढ़ पीड़ितों की है भीड़

बाढ़ प्रभावित लोगों की जिंदगी बेपटरी हो गई है। प्रशासन की तरफ से उन्हें बस एक प्लास्टिक दी गई है। दरअसल 23 जुलाई की रात गोपालगंज के पांच प्रखंडों के लोगों के लिए आफत की रात साबित हुई थी। सारण तटबंध व रिंग बांध टूटने से सोए हुए लोगों के घरों में बाढ़ का पानी फैल गया। लोग अपने जाना माल की रक्षा के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई लोगों के घरों में रखे अनाज, जेवर और जरूरी कागजात भींग कर बर्बाद हो गए। बाढ़ पीड़ितों ने घर छोड़कर उच्चे स्थान पर शरण लेने लगे। प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद देने का भरोसा दिलाया। लेकिन 17 दिन बाद भी बाढ़ पीड़ितों को राहत नहीं मिल सका।
बाढ़ प्रभावित उच्चे स्थान पर लिए है शरण
जिले में बाल्मीकिनगर बाराज से छोड़े गए साढ़े चार लाख क्यूसेक पानी के कारण सारण तटबंध टूट गया। जिससे कई गांव में बाढ़ की भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई। लोग एनएच-28 और रेलवे स्टेशन और रेलवे लाइन के किनारे बच्चों के साथ शरण लेकर अपने दिन गुजार रहे हैं। लेकिन प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई मदद मुहैया नहीं कराई गई है। हालांकि प्रशासन ने पॉलिथिन सीट और सामुदायिक किचेन चलाने का दावा करती रही।

जिले के पांच प्रखंड के 66 पंचायतों में तबाही
दरअसल 23 तारीख की रात आई विनाशकारी बाढ़ ने गोपालगंज ,मांझा, बरौली, सिधवलिया और बैकुंठपुर प्रखंड के 66 पंचायतों में तबाही मचा दी। जिसमें 3 लाख 82 हजार 15 लोग प्रभावित हुए । विनाशकारी बाढ़ में आज भी बहुत सारे लोग घिरे हुए हैं। लोगों के बीच प्रशासनिक मदद पहुंचा पाना संभव नहीं दिखा। बाढ़ के पानी के बीच कुछ ऐसे भी लोग थे जो अपनी जान माल की रक्षा के लिए गांव छोड़कर ऊंचे स्थानों, बांध, एनएच और रेलवे स्टेशन पर वक्त आज भी गुजार रहे हैं।

प्रशासन के दावे खोखले
उच्चे स्थान पर शरण लेने वाले बाढ़ प्रभावितों की कोई मदद करने वाला नहीं है। प्लास्टिक की झोपड़ी बनाकर पूरा परिवार उसमें शरण लेने को मजबूर हैं। सरपट दौड़ती एनएच 28 पर वाहनों की रफ्तार और रुकरुक कर हो रही बारिश की पानी इन लोगों में डर पैदा कर देती है तो कहीं बांध पर सांप के काटने का डर। वहीं बाढ़ को लेकर एक तरफ सरकार तैयारियां पूरी होने के दावे कर रही है। प्रशासन के सारे दावे खोखले नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोग व सामाजिक संगठन बाढ़ प्रभावितों को भोजन मुहैया करा रहे हैं।

कभी स्टेशन पर रहती थी यात्रियों की भीड़,आज बाढ़ पीड़ितों की है भीड़
जिस रेलवे स्टेशन पर कभी ट्रेन के इंतजार करने वाले यात्रियों की भीड़ लगी रहती थी, वह आज बाढ़ पीड़ितों की ठिकाना बना हुआ है। बाढ़ प्रभावित लोग आसमान के नीचे अपने दम पर प्लास्टिक तानकर झोपड़ीनुमा घर बनाकर अपने परिवार के साथ रह रहे है। बाढ़ से प्रभावित मंगलदेव प्रसाद ने बताया कि बुचेया गांव में बाढ़ के पानी आने को लेकर जिनके घर में पानी लग गया वह रेलवे स्टेशन पर अशियाना बनाकर रह रहे है। प्रशासन की ओर से राहत के नाम पर खानापूर्ति के सिवा कुछ नहीं मिला। अकेले मंगलदेव प्रसाद नहीं है,ऐसे सैकड़ों लोग है जो उच्चे स्थान पर शरण लिए हुए है।

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