गोपालगंज में आज से कोविड मरीजों की टीबी जांच:हर कोरोना संक्रमित मरीजों में टीबी के संक्रमण की भी होगी जांच, क्योंकि वायरस का सबसे ज्यादा फेफड़ा पर असर

गोपालगंज3 महीने पहले
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टीबी और कोविड-19 दोनों ही ऐसे संक्रामक रोग हैं, जो सबसे पहले फेफड़ों पर हमला करते हैं। - Dainik Bhaskar
टीबी और कोविड-19 दोनों ही ऐसे संक्रामक रोग हैं, जो सबसे पहले फेफड़ों पर हमला करते हैं।

गोपालगंज में कोरोना संक्रमित या कोरोना से ठीक हुए मरीजों की अब टीबी (तपेदिक) की जांच की जायेगी। इसके साथ टीबी जांच में पहचान किये गये मरीजों की कोविड टेस्ट भी किया जायेगा। इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी कोविड-19 संक्रमित मरीजों के लिए क्षय रोग (टीबी) की जांच और पहचान किए गए सभी टीबी मरीजों के लिए कोविड-19 परीक्षण की सिफारिश की है। सिविल सर्जन जोगिंदर महतो ने कहा कि बुधवार से कोरोना संक्रमित या कोरोना से ठीक हुए लोगों के टीबी जांच कर निर्देश दिया गया है। लोगों से भी अपील है कि वे अपना जांच करवाएं।

सिविल सर्जन के कहा कि टीबी और कोविड-19 दोनों ही ऐसे संक्रामक रोग हैं, जो सबसे पहले फेफड़ों पर हमला करते हैं, दोनों ही बीमरियों के लक्षण एक जैसे यानी खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ होना है। हालांकि, टीबी के संक्रमण के बाद बीमारी काफी धीमी गति से विकसित होती है, वही कोविड-19 में बीमारी तेजी से विकसित होती है।

टीबी मरीजों की खोज अभियान से प्रभाव को कम करने का प्रयास

सिविल सर्जन के कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक कोविड-19 संबंधित प्रतिबंधों के प्रभाव के चलते 2020 में टीबी के मामलों की अधिसूचना में लगभग 25 फीसदी की कमी आई थी, लेकिन सभी राज्य OPD समायोजन में गहन मामले की खोज के साथ-साथ समुदाय में सक्रिय मामले की खोज अभियानों के माध्यम से इस प्रभाव को कम करने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। इससे अतिरिक्त, वर्तमान में यह बताने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं कि कोविड-19 के कारण टीबी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है या मामले खोजने के प्रयासों में वृद्धि हुई है।

टीबी और कोरोना दोनों संक्रामक बीमारी

क्षय रोग (टीबी) और कोविड-19 की दोहरी रुग्णता को इस तथ्य के जरिए और अधिक सामने लाया जा सकता है कि दोनों बीमारियों को संक्रामक रोग के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से फेफड़ों पर हमला करते हैं। ये खांसी, बुखार व सांस लेने में कठिनाई जैसे समान लक्षण पैदा करते हैं। हालांकि, टीबी से संक्रमित होने की अवधि लंबी होती और इस बीमारी की शुरुआत की गति धीमी होती है।

निष्क्रिय अवस्था में शरीर में मौजूद रहता है टीबी का रोगाणु

टीबी के रोगाणु निष्क्रिय अवस्था में मानव शरीर में मौजूद हो सकते हैं और किसी भी कारण से व्यक्ति की प्रतिरक्षा कमजोर होने पर इसके रोगाणु में कई गुणा बढ़ोतरी होने की क्षमता होती है। समान रूप से ये चीजें कोविड के बाद के परिदृश्य में लागू होती हैं, जब वायरस के कारण या इलाज, विशेष रूप से स्टेरॉयड जैसी प्रतिरक्षा-कम करने वाली दवा के चलते किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा कम विकसित हो सकती है। सार्स-COV-2 संक्रमण एक व्यक्ति को सक्रिय टीबी बीमारी विकसित करने के लिए अधिक संवेदनशील बना सकता है, क्योंकि टीबी ब्लैक फंगस की तरह एक अवसरवादी संक्रमण है।

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