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खतरा टला:पकहां में नदी की धारा रोकने के लिए कटाव स्थल पर निर्माण शुरू, 5 दिनों में ढ़ाई फीट कम हुआ बाढ़ का पानी

गोपालगंजएक महीने पहले
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  • बैकुंठपुर में सात जगहों पर टूटे तटबंध, 200 गांवों में अब भी बाढ़ की तबाही, आवाजाही के लिए ग्रामीणों ने बनाया चचरी पुल

बाढ़ की तबाही रोकने के लिए पकहां और चिउटाहां में कटाव स्थल पर रिंग बांध बनाने का काम शुरू हो गया है। एक सप्ताह में दोनों जगहों पर बांध बनकर तैयार हो जाएगा। उम्मीद है कि पूर्वाचल में बाढ़ का तबाही जल्द ही खत्म हो जाएगी। हालांकि कटाव स्थल पर अभी पानी का बहाव काफी तेज है। इससे बांध मरम्मत कर रही एजेंसी को कई तरह की मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। पानी के तेज बहाव से अभी 200 गांवों में बाढ़ की तबाही कम नहीं हो रही है।

जलस्तर की बात करें तो 5 दिनों में ढ़ाई फूट पानी कम जरूरी हुआ है, लेकिन लो लैंड एरिया के इन गांवों में अभी भी 3 से 4 फूट पानी बह रहा है। राहत की बात यह है कि नेपाल बराज से भी पिछले 8 दिनों में पानी का डिस्चार्ज काफी गिर गया है। शुक्रवार को बाल्मीकि नगर डैम से 1 लाख 73 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदी के जलस्तर में भारी गिरावट आई है। बावजूद गंडक नदी अभी खतरे के निशान के समानांतर बह रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग चचरी पुल बनाकर सड़क संपर्क बहाल कर रहे हैं।

बैकुंठपुर में 7 जगह टूटा है बांध
मांझा प्रखंड के पुरैना में बांध बनने के बाद अब बैकुंठपुर के पकहां और चिउटाहां में कटाव स्थल पर निर्माण शुरू हो गया है। बैकुंठपुर में सात जगहों पर जमीनदारी बांध, सारण मुख्य तटबंध और सारण रिटायर्ड बांध टूटा है। सबसे पहले पकहां गांव के समीप जमीदारी बांध 120 मीटर टूट गया। पकहा में तटबंध टूटने के बाद सारण मुख्य तटबंध कृतपुरा, बंधौली, बैकुंठपुर, सोनवलिया, बंगरा और मूंजा में टूट गया था। नदी के पानी का मेन स्त्रोत पकहां में 250 मीटर में रिंग बांध बनाने का काम शुरू हो गया है। मां समुंद्री कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा पकहां और चिउटाहां में निर्माण कार्य कराया जा रहा है। दोनों जगहों पर करीब 700 मजदूर निर्माण कार्य में जुटे हैं।

तटबंध टूटने से ग्रामीणों में नाराजगी
सात जगहों पर तटबंध टूटने के बाद ग्रामीण बाढ़ नियंत्रण विभाग की कार्यशैली से नाराज दिख रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों का मानना है कि यदि तटबंध बरसात के पहले दुरुस्त कर लिया जाता तो हजारों लोग बाढ़ की तबाही नहीं झेलते। सैकड़ों लोगों को बेघर नहीं होना पड़ता। बाढ़ की भीषण तबाही के बीच अब तटबंध का निर्माण शुरू किया गया है। हालांकि पकहां में तटबंध का निर्माण पूरा होने के बाद बैकुंठपुर के दस पंचायतों के बाढ़ पीड़ितों को राहत मिलेगी।

15 हजार परिवार अभी भी विस्थापित
बरौली, सिधवलिया और बैकुंठपुर के करीब 15 हजार बाढ़ पीड़ित परिवार अभी भी विस्थापित होकर तटबंध व सड़क पर शरण ले रखे हैं। जमींदारी बांध, सारण मुख्य तटबंध तथा सारण रिटायर्ड बांध पर बाढ़ पीड़ितों की टेंट डुमरिया घाट से लेकर 32 किलोमीटर पूरब आशा खैरा गांव तक दिख रही है। इसके अलावा एनएच 101, एनएच 28, स्टेट हाईवे 90 सहित कई प्रमुख सड़कों को बाढ़ पीड़ित अपना रेन बसेरा बना डाले हैं। छपरा-थावे रेलखंड के सिधवलिया सहित कई रेलवे स्टेशनों पर बाढ़ पीड़ित तंबू लगाकर रहने को विवश हैं। इनके घरों में बाढ़ का पानी बहने के कारण फिलहाल यह घर लौटने की स्थिति में नहीं है।

150 गांवों का सड़क संपर्क भंग, कई गांवों चचरी पुल का सहारा
बाढ़ की स्थिति में सुधार होने के बाद 150 गांवों का सड़क संपर्क 15 वें दिन भी भंग रहा। 129 गांवों में 3 से 4 फूट बाढ़ का पानी बह रहा है। लोगों के लिए आवागमन का साधन नाव और मोटर बोट है । इसके अलावे जिन गांवों में पुल-पुलिया ध्वस्त हो गई है वहां लोग बांस का चचरी पुल बनाकर आवाजाही कर रहे हैं। सोनवलिया गांव के ग्रामीण झमेन्द्र पांडेय, दिनेश सिंह, विजय सिंह ने बताया कि पुल टूट जाने से आवजाही बंद थी। गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से चचरीपुल का निर्माण कर खुद को सड़क संपर्क से जोड़ लिया है।

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