श्रद्धालुओं की भीड़:नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गोपालगंज19 दिन पहले
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दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। - Dainik Bhaskar
दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
  • वन्दे वांक्षित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌, वृषारूढां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम् मंत्रों के साथ भक्तों ने की पूजा

वन्दे वांक्षितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम। वृशारूढ़ां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम् मंत्रों के साथ नवरात्र के पहले दिन भक्तों ने मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की शुरुआत की। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल विराजमान है। तथा माथे पर चंद्रमा सुशोभित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन मां शैलपुत्री की आराधना करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।

मां शैलपुत्री को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना कर व्रत रखने से भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है व सभी कष्टों का निवारण होता है। सुबह से ही घर-घर मां की पूजा की चल रही थी तैयारियां शारदीय नवरात्र के पहले दिन शहर के मंदिरों में माता रानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। विधि-विधान से मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। साथ ही लोगों ने घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की। देवी मंदिर माता रानी के जयकारों से गूंज उठे।

श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवती के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री से सुख समृद्धि की कामना भी की।गुरुवार सुबह से ही घर-घर मां की पूजा की तैयारियां शुरू हो गयीं। भक्तों ने अपने घरों में कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। दुर्गा मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं ने जी भर मां के दर्शन किए। सुख समृद्धि के लिए कामना की। मां शैलपुत्री पूजा विधि\nमां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन माता को सफेद वस्त्र, सफेद फूल चढ़ाना चाहिए।

साथ ही सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष फल की प्राप्ति होती है। मां शैलपुत्री की पूजा करते समय उनके चरणों में गाय का घी अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां शैलपुत्री सुख समृद्धि का वरदान देते हैं। तथा मनवांक्षित फल की प्राप्ति के लिए इन मंत्रों का जाप करना चाहिए। माता शैलपुत्री की पौराणिक कथा होती है चर्चा पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने अपने घर पर एक बड़े यज्ञ का आयोजन करवाया।

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