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बदलाव:मौसम के सिमटम पर कीजिए खेती, अभी से तैयार करें बिचड़ा; मानसून की पहली बारिश में ही लगाएं धान के पौधे

गोपालगंज8 महीने पहले
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  • मौसम विभाग ने दिया संकेत, पिछले साल से ज्यादा होगी इस साल बारिश, 13 जून को उतर जाएगा मानसून

(संजय पांडेय) किसान भाईयों, लॉकडाउन ने भौगोलिक सिस्टम सुधार दिया है। मौसम चक्र बदल गया है। पहले से ज्यादा बारिश होने लगी है। इस बार भी औसत से ज्यादा बारिश होने की भविष्यवाणी है। मानसून भी समय से उतरने वाला है। ऐसे में सिमटम पर आधारित खेती आपके लिए फायदेमंद रहेगी। खेती का पुराना ढर्रा छोड़कर नयी तकनीक का इस्तेमाल करें। खरीफ की खेती के लिए मौसम के सिमटम को पकड़िए। फायदे में रहिएगा। .... नहीं तो अतिवृष्टि के कारण फिर से पछताना पड़ सकता है।
एडवांस किसानी करें
खेत खाली रखने से बेहतर है अभी से ही धान का बिचड़ा तैयार कर लें और मानसून की पहली बारिश में रोपाई कर दें। इससे खेती अगत रहेगी। फसलों पर लगातार आपदा की मार देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मौसम बदलते चक्र के अनुसार खेती करने को कहा है। कृषि विभाग भी इसे उपयुक्त बता रहा है।
क्यों पिछड़ रही खेती?
पहले से पैटर्न रहा है कि हम 25 मई से 30 जून तक बिचड़ा गिराते थे। जबकि 10 से 30 जून मानसून का पिक समय है। ऐसे में ज्यादा बारिश की बिचड़े के लिए नुकसानदेह बन जाती है। रोपनी हमारे यहां 25 जून से 31 जुलाई के बीच होती है। अक्सर देखा गया कि 15 जुलाई के बाद मानसून कुछ दिनाें के लिए शिथिल पड़ने लगता है। तब किसान रोपनी के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए रहते हैं।  
यह तरकीब अपनाएं
कृषि विशेषज्ञ सुधीर कुमार वर्मा के अनुसार बिचड़ा तैयार करने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है। अभी खेतों में नमीं भी बरकरार है। ऐसे में खेत खाली रखने से कोई फायदा नहीं है। बिचड़ा गिराना शुरू कर दें। ज्यादा पानी की जरूरत रोपाई के समय होती है। तब तक मानसून पूरी तरह से छा जाएगा।
6 प्रतिशत ज्यादा मजबूत होगा
मानसून को लेकर जारी अपडेट में बताया गया है कि इस बार जिले में यह 6% ज्यादा मजबूत स्थिति में रहेगा। यानी कि औसत से 30 फीसदी ज्यादा बारिश होने के आसार हैं। जिले में औसत वर्षापात 1020 मिमी है। इस लिहाज से 1450 मिमी से ज्यादा बारिश की उम्मीद लगाई जा रही है। जिला अभी कोरोना की मार झेल रहा है ऐसे में अतिवृष्टि प्रकृति की दोहरी मार साबित हो सकती है।
धान की खेती का विभागीय टारगेट
बिचड़ा का लक्ष्य- 8,800 हेक्टेयर
खेती का लक्ष्य- 88,000 हेक्टेयर
उत्पादन का लक्ष्य- 2,40,600 मि.टन
जिले की औसत वर्षापात
जून- 172.8      
जुलाई- 314.1      
अगस्त- 310.6      
सितंबर- 222.8    
क्या है मौसम का यह चक्र
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के अनुसार मौसम चक्र 15 दिन आगे की ओर खिसक गया है। नतीजतन 15 दिन अगत खेती करनी होगी। आपने गेहूं की कटनी के समय ही देख लिया है कि प्री-मानसून 15 दिन पहले एक्टिव हो चुका था। जिसने अगत खेती की थी उनका कोई नुकसान नहीं हुआ। पछात खेती करने वाले अनाज का भंडारण नहीं कर सके हैं।
13 जून से सक्रिय होगा मानसून, ज्यादा बारिश
जिले में मानसून 13 जून से सक्रिय होगा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार के अनुसार जून के पहले सप्ताह में मानसून केरल तट पर दस्तक देगा। उसके बाद यह 13 जून को बिहार में प्रवेश करेगा। मानसून इस बार सीमांचल के क्षेत्र यानी पूर्णिया रास्ते जिले में प्रवेश करेगा।
सुनें अनुभवी किसानों की

  • मौसम नार्थ-ईस्ट के पैटर्न पर चल रहा है, इस लिए खेती भी उसी पैटर्न पर करनी पड़ेगी। तभी मौसम के अनुकूल खेती कहलाएगी। -शौकत अली, राजापट्‌टी
  • दूसरे प्रदेशों का अनुसरण कर हमने बिचड़ा गिरा दिया है। 5-7 जून तक बिचड़ा तैयार भी हो जाएगा। पिछले साल से ऐसा ट्राई किया था, सफल रहा। -प्रह्लाद प्रसाद, गम्हारी

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