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सतर्क रहें:गोपालगंज पर आपदा भारी, परेशान कर रही बाढ़ बारिश व बीमारी, जनजीवन पूरी तरह बेपटरी हुई

गोपालगंज10 महीने पहले
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  • जीतने का एक ही मंत्र: घर में रहें, धैर्य रखें, कुछ दिन में सामान्य हो जाएगा जनजीवन
  • कोरोना के मामले में जिला सूबे के सर्वाधिक संक्रमित जिलों की सूची में आठवें पायदान पर पहुंचा

(संजय पांडेय) गोपालगंज पर इन दिनों आपदा की तिहरी तबाही देखने को मिल रही है। बाढ़, बारिश और बीमारी एक साथ कहर बरपा रहा है। इससे जन जीवन पूरी तरह से बेपटरी हो गया है। यह पहला मौका है जब जल,थल और आसमान तीनों ओर से आए तबाही के मंजर ने जन जीवन को बेपटरी कर दिया है। बीमारी की बात करें तो कोरोना के मामले में जिला सूबे के सर्वाधिक संक्रमित जिलों की सूची में आठवें पायदान पर पहुंच गया है।

गांव व बाजारों में वायरस कम्यूनिटी ट्रांसमिशन का संकेत दे रहा है। आसमानी आफत की बात करें जिले में 19 साल बाद अतिवृष्टि हो रही है। जून में औसत से 45 फीसदी और जुलाई अब तक महीने के कोटे का 82% बारिश हो चुकी है। तीसरी आपदा बाढ़ की है। आपको बता दें कि करीब 40 साल बाद पहली बार गंडक नदी 10 जून से ही उफान पर है और दियारे में तबाही मचा रही है। जानिए इस खबर में कि किस कदर लोगों पर आपदा की तिहरी मार पड़ रही है ....

सतह पर ...कोरोना का कहर
जिले में कोरोना का केस 523 हो चुका है। सूबे के सर्वाधिक संक्रमण वाले जिलों की सूची में गोपालगंज अब 8 वें नंबर पर पहुंच गया है। यहां अब कम्यूनिटी ट्रांसमिशन जैसे हालात बन गए हैं। जुलाई में संक्रमण का दर काफी बढ़ा है। जिले में 23 मार्च से 31 मई तक चार चरणों के लॉकडाउन के 70 दिन और 1 से 30 जून अनलॉक के 30 दिन यानी 5 फेज के 100 दिन में 286 कोरोना के मरीज मिले थे। वहीं जुलाई के महज 14 दिन में ही 237 लोग संक्रमित हुए हैं। जिले की यह स्थिति पूरे प्रदेश की चिंता बढ़ाने वाली है। जिले में संक्रमण दर की बात करें तो यह 19.08 फीसदी से बढ़कर 26.2 पर पहुंच गया है।
भास्कर अपील : धैर्य बनाए रखें, अभी घर में ही रहें      
आपदा की तिहरी कहर से लोगों का चिंतित होना लाजमी है, लेकिन जिलेवासियों की यह परीक्षा की भी घड़ी है। ऐसे में अाप विचलित होने की बजाय कुछ दिन घर में और घरों में रहें। आपका धैर्य, साहस और संयम ही तीनों आपदा को हराएगा। ...और कुछ दिनों में जन जीवन फिर से सामान्य हो जाएगा। चूंकि बारिश, बज्रपात, वायरस और बाढ़ से बचने का एक ही मंत्र है- कुछ दिनों तक कदम बाहर निकालने से परहेज कीजिए। कारण कि बाहर मजबूत और अदृश्य शत्रु है।

जल में.... बाढ़ की विभिषिका
साल 1997 से 2017 के बीच जिले में 6 बार बांध टूटे थे। हर साल की बाढ़ की तबाही के समय पर गौर करें तो 5 अगस्त के बाद ही बांघ टूटे थे। अमूमन 15 जून के बाद ही नदी का पानी बढ़ता है। 25 जुलाई के बाद दियारे में पानी का फैलाव होता है। लेकिन इस बार परिस्थितियां 40 साल बाद उलटा पड़ गई है। 10 जून से नदी उफान पर है। 16 जून से दियारे के बाद की तबाही है। 13 जुलाई से ही पानी का डिस्चार्ज 3 लाख क्यूसेक को पार गया। कई जगहों के बांध पर नदी का दबाव बढ़ गया है। 40 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिले के छह प्रखंडों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मंगलवार को 3.40 लाख क्यूसेक पानी फिर से छूटा है।
आसमान से.... हर दिन आफत की बारिश
साल 2001 के बाद इस बार फिर से मानसून आसमान से आफत बरसा है। पिछले साल अतिवृष्टि हुई थी, लेकिन जुलाई और सितंबर के महीने में हीं। इस बार जून से ही अतिवृष्टि ही रही है। जिले में जून महीने का सामान्य वर्षापात 172.8 मिमी है। इसके एवज में 241.8 मिमी बारिश हुई थी। यह सामान्य से 40% ज्यादा है।

वहीं जुलाई महीने का औसत वर्षापात 314.1 है। इसके एवज में 14 जुलाई तक 260.3 मिमी बारिश हो चुकी है। यानी 14 दिन में ही महीने के कोटे का 82.87% बारिश हो चुकी है। इससे किसानों के खेत में लगी धान की फसल पानी में डूब रही है। बीते 25 जून को ही विभिन्न जगहों पर आसमानी बिजली गिरने से जिले में 11 लाेगाें की मौत भी हो गई है।

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