आपबीती / पेट और जेब दोनों खाली करके दिल्लीवालों ने हमें छोड़ दिया,भूखे भी मरेंगे तो अपनी माटी पर

Emptying both the stomach and the pockets, the people of Delhi left us, if we die of starvation on our soil
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Emptying both the stomach and the pockets, the people of Delhi left us, if we die of starvation on our soil

  • जीरो ग्राउंड से भास्कर प्रवासी बोले - कौन कहता है कि दिल्ली दिल वालों की है‌, सबके दिल पत्थर के हैं, कोई किसी का नहीं है ...
  • 25 दिन में बिहार बाॅर्डर से अपने गांव गए 3 लाख से ज्यादा प्रवासी

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 05:00 AM IST

गोपालगंज.  भले ही बिहार बार्डर से प्रवासियों के पैदल जाने का सिलसिला थम गया है, लेकिन महानगरों से इनका पलायन नहीं थमा है। यूपी के रास्ते रोजाना 5000 से ज्यादा प्रवासी महानगरों को हमेशा के लिए छोड़कर अपने गांवों को लौट रहे हैं। यह सदी का सबसे बड़ा पलायन है। 1 मई से ही बात करें तो 25 दिनों में बलथरी चेकपोस्ट के रास्ते 3 लाख से ज्यादा प्रवासी विभिन्न जिलों के लिए हाईवे से गुजरे हैं। वहीं जिला प्रशासन ने ट्रेनों व बसों से 1 लाख 80 हजार लोगों को उनके गृह जिले भेजवाया है। क्या है प्रवासियों का गांव कनेक्शन? क्यों पलायन को मजबूर को हुए ये मजदूर? अब ये गांव में रहकर करेंगे क्या? ये कई सवाल हैं जो जीवन पलायन की उलझनों को बढ़ा रहे हैं। सुनिए इनकी मजबूरी की दास्तां.....
 लौटना नहीं चाहते थे ....मकान मालिक ने घर से निकाल दिया
कटिहार के डंडखोरा प्रखंड के सौरिया के रमेश यादव ट्रेन से जाने के लिए जलालपुर स्टेशन पर पहुंचे हैं। उनके साथ सरैया और महेशपुर के 12 साथी हैं। वे सभी गुड़गांवा की अलग-अलग फैक्ट्रियों में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद वहां ताले लग गए। वे घर जाना नहीं चाहते थे, लेकिन मकान मालिकों ने उन्हें घर से निकाल दिया, क्योंकि वो भी जानते थे कि ये अब किराया नहीं दे पाएंगे।
12 घंटे जानवरों की तरह खटाता था 
सर आपसे किसने कहा कि- दिल्ली दिल वालों की है। वहां तो सब पत्थर के बने हैं। वहां काम की पूजा होती है चाम की नहीं। 12 घंटे जानवरों की तरह खटाता है सब, तब जाकर पगाड़ मिलती है महीने का 8 हजार। सोचिए कितना बचता होगा कि लॉकडाउन में बैठकर खाएं। वहां किसी का कोई नहीं है। पैसे के लिए बिहारी ठेकेदार को फोन करते थे, लेकिन उसने भी फोन बंद कर लिया। यह दर्द है दरभंगा प्रखंड के बरौल प्रखंड के किरतपुर गांव के महेश दास की। वे चेकपोस्ट पर बस से जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने आए हैं।  

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