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बिहार के इस गांव में मक्खियों के कारण लड़के कुंवारे:कई की शादी होते-होते टूटी, 10 परिवारों ने छोड़ दिया गांव; मच्छरदानी के अंदर बीत रही जिंदगी

अटल बिहारी पांडेय|गोपालगंज4 महीने पहले
मक्खियों के डर से दिन में मच्छरदानी में बैठकर खाना खाते और पढ़ाई करते बच्चे। - Dainik Bhaskar
मक्खियों के डर से दिन में मच्छरदानी में बैठकर खाना खाते और पढ़ाई करते बच्चे।

आपने मक्खी फिल्म देखी होगी जिसमें एक मक्खी विलन की नाक में दम कर देती है। वो उसे इतना परेशान कर देती है कि उसका जीना ही मुश्किल हो जाता है। वो लड़की से दूर रखने के लिए बार-बार उसे परेशान करती रहती है। ये तो थी रील लाइफ की कहानी, अब हम आपको बताते हैं रीयल लाइफ की कहानी। बिहार के गोपालगंज में एक ऐसा गांव है, जहां मक्खियों का आतंक है। फिल्म मक्खी की तरह इस गांव के लोगों को मक्खियों ने परेशान कर रखा है। नौबत यहां तक आ गई है कि इस गांव में लोग अपनी बेटियों की शादी करने से कतरा रहे हैं। वहीं तीन लड़कों की शादी तो तय होते-होते रह गई। अब तक 10 परिवार ने मक्खियों के आतंक से तंग आकर गांव ही छोड़ दिया।

मक्खियों के कारण 3 लड़कों की शादी होते-होते टूट गई।- फाइल फोटो
मक्खियों के कारण 3 लड़कों की शादी होते-होते टूट गई।- फाइल फोटो

हम बात कर रहे हैं गोपालगंज के सदर ब्लॉक के विक्रमपुर गांव की। 3 हजार की आबादी वाले इस गांव में मक्खियों का आतंक इस कदर है कि लोगों का खाना-पीना दुष्वार हो गया है। यहां के लोग 5 सालों से मक्खियों से परेशान हैं। रात हो या दिन मक्खियों की भनभनाहट लगातार सुनाई देती है। लोग दिन हो या रात मक्खियों के डर से मच्छरदानी में ही खाना खाते हैं। बच्चे भी मच्छरदानी में बैठकर अपनी पढ़ाई करते हैं।

मक्खियों के डर से मच्छरदानी में खाना खाते और पढ़ाई करते बच्चे।
मक्खियों के डर से मच्छरदानी में खाना खाते और पढ़ाई करते बच्चे।

लड़की वाले आए तो उनके नाश्ते पर मंडराने लगी मक्खियां
गांव के युवक अनिकेत ने बताया कि- मक्खियों की वजह से अब तक गांव के 3 लड़कों की शादी टूट चुकी है। इनमें से एक सतेंद्र उर्फ सरल यादव है। जिसकी शादी 3 महीने पहले मधुबनी जिले में तय हुई थी। लड़की के परिजन जब लड़के के घर पहुंचे तो मक्खियों को देख परेशान हो गए। जब नाश्ता परोसा गया, मक्खियां उसमें भी भिनभिनाने लगी। इससे तंग आकर लड़की वाले बिना नाश्ता किए शादी का रिश्ता तोड़कर उल्टे पांव मधुबनी लौट गए।

रिश्ता टूटने वालों में अकेला सरल ही नहीं बल्कि इनमें रोहित पटेल, सतेंद्र यादव भी शामिल हैं। अब तक इस गांव से सुंदर पटेल, संदीप यादव, राहुल कुमार, किशन यादव समेत 10 लोग हैं जो पलायन कर चुके हैं।

10 लोग परिवार के साथ गांव छोड़कर जा चुके हैं।
10 लोग परिवार के साथ गांव छोड़कर जा चुके हैं।

पोल्ट्री फॉर्म के कारण मक्खियों की भरमार
ग्रामीणों की मानें तो गांव के इर्द-गिर्द कई पोल्ट्री फॉर्म चलते हैं। इससे यहां मक्खियों की भरमार रहती है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन को कई बार मक्खियों से हो रही परेशानी के बारे में जानकारी दी गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया गया।

डॉक्टर ने बताया मक्खियां स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि- मक्खियां इंसानों और जानवरों के लिए खतरनाक रोग फैलाने वाले जीवाणु फैलाती हैं। इसे भगाने के लिए कोई छिड़काव का साधन भी नहीं होता है। साफ-सफाई बना कर रखने से ही मक्खियों को भगाया जा सकता है। मक्खियां सड़े -गले और दुर्गंध वाले कार्बनिक पदार्थ जिनकी नमी 50-85% हो, ऐसे में अंडे देती हैं। पोल्ट्री खाद में लगभग 75-80% नमी की मात्रा होती है, जो मक्खियों की आबादी पनपने के लिए एक माध्यम है।