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मुुसीबत:4 प्रखंडों में बाढ़, गंडक का जलस्तर 8 सेमी घटा सिधवलिया व बैकुंठपुर के क्षेत्रों में बढ़ रहा पानी

गोपालगंज13 दिन पहले
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  • मांझा, बरौली, सिधवलिया व बैकुंठपुर के 400 गांव का सड़क, बाजार व मुख्यालय से संपर्क टूटा

भले ही गंडक के जलस्तर में दूसरे दिन भी नरमी देखने को मिली, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। नदी का जलस्तर अपनी मुख्य धारा में 8 सेमी नीचे गया है। मांझा व बरौली के कुछ इलाके में बाढ़ का पानी 3 से 4 सेमी कम हुआ है। लेकिन सिधवलिया और बैकुंठपुर कई ऐसे इलाके हैं जहां बाढ़ का पानी अभी भी बढ़ रहा है। बता दें कि जिन इलाकों में 4 से 5 फीट पानी बह रहा है वहां आंशिक नरमी पीड़ितों को राहत देने से रही, परंतु तसल्ली इतना है कि पिछले दो दिनों से बाल्मीकि नगर डैम से पानी का डिस्चार्ज कम हो रहा है। शनिवार की दोपहर बराज से गंडक में 1 लाख 86 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शुक्रवार का डिस्चार्ज भी इतना ही था।
छलका दर्द .... बच्चों की जरूरत भी नहीं कर रहे पूरी
मांझा, बरौली, सिधवलिया और बैकुंठपुर के 400 गांव ऐसे हैं जो पूरी तरह से सड़क, बाजार और मुख्यालय से कट गए हैं। चाह कर भी जरूरी सामान की खरीदारी नहीं कर सकते। बाढ़ का पानी घुसने से हाट-बाजार भी बंद हैं। ऐसे में घर में जो सामान है बस उसी से काम चला रहे हैं। फैजुलाहपुर के विजय ठाकुर ने बताया कि बच्चों के लिए दूध मिलने का कोई उपाय नहीं है। सोनवलिया के झमेंद्र पांडेय ने बताया कि तीन दिनों से रसोई गैस खत्म है। रास्ता नहीं खुलने से गिली लकड़ी से ही खाना पक रहा है। आलम यह है कि जो लोग दूसरों को खिला थे, वे आज सरकारी सहायता पर निर्भर हो गए हैं।
मुसीबत की बाढ़
जल प्रलय अपने साथ मुसीबतों की बाढ़ लेकर आई है। जिन बच्चों के हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए वो पीने के पानी और खाने के लिए हाथ फैला रहे हैं। कई तस्वीरों में बच्चों को छाती तक भरे पानी में देखा जा सकता है। वहीं कुछ महिलाएं व युवक हैं पानी में तैर कर या केले के थम का नाव चलाकर, जरूरतों का सामान इकट्ठा करके खुद व अपने परिवार को बचाने की कोशिश में लगे हैं। कई ऐसे बुजुर्ग हैं जिनके घर तो उजड़ गए हैं, लेकिन वो अपने उजड़े घर के कुछ हिस्सों को बचाने की आखिरी कोशिश में लगे हुए हैं।

फसल की जगह दिख रहा जल सैलाब
बाढ़ में किसानों के खेतों में खड़ी फसल बह गई हैं। चारों प्रखंड में धान, मक्का व गन्ने की करीब 16 हजार हेक्टेयर फसल का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जहां खरीफ की फसलें बोई गई थी वहां पर पानी ही पानी भरा नजर आ रहा है।

किसानों की मेहनत पर फिर गया पानी
पिछले तीन साल से आपदा की मार झेल रहे जिले के किसानों ने इस बार मानलसून के समय से उसने पर अच्छी खेती कर रखी थी। जिले में 84 हजार हेक्टेयर धान की खेती के लक्ष्य के मुकाबले 94% खेतों में रोपनी हो चुकी थी। लोगों के खेत में धान की फसल लहलहा रही थी। लेकिन आपदा की मार ने साढ़े तीन साल में किसानों की 7 वीं फसल भी निगल ली।

बाढ़ की धार में बह गए 300 घर
बाढ़ और कटान की धार 300 से ज्यादा लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। ज्यादातर कच्चे व कुछ पक्के मकानों के धराशार्इ हो जाने से 300 से ज्यादा परिवार अब विस्थापित का जीवन जीने को मजबूर हो गए हैं। गंडक की इस विनाश लीला ने 10 साल में 15 हजार से ज्यादा लोगों को बेघर कर दिया है। महोदीपुर, माेहनिया, कटघरवां, मकसूदपुर सहित कई गांव कटाव के कारण नक्शे से विलुप्त हो गए हैं।

छोटी नदियां व नाले भी उफान पर
बांढ के कारण जिले की छोटी-बड़ी 8 नदियों के साथ तमाम नाले भी उफान पर है। बाढ़ होने के कारण नाले का पानी निकल नहीं पा रहा है। ज्यादातर रिहाइशी इलाके में पहले यही पानी भर रहा है, जिसकी वजह से बाढ़ का पानी पहुंचते ही बसावटों को डूबो देता है।

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