पहल:प्रारंभिक स्कूल के एचएम स्कूल का करेंगे ग्रेडिंग, वरीय पदाधिकारी करेंगे क्रॉस जांच, बच्चों का होगा मूल्यांकन

गोपालगंज5 दिन पहले
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  • स्कूल और कॉलेज बंद होने से ऑनलाइन गुणवत्ता शिक्षा देने की पहल की जा रही है, एचएम खुद करेंगे मूल्यांकन

प्रारंभिक स्कूलों के बच्चों को शिक्षक कितना पढ़ाते हैं और बच्चे इस बारे में क्या राय रखते हैं। इसको लेकर स्कूलों की ग्रेडिंग दी जाएगी। स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए यह पहल की जा रही है। फिलहाल कोरोना संक्रमण को लेकर सभी स्कूल व कॉलेज बंद हैं। लिहाजा फिलहाल बच्चों को ऑनलाइन गुणवत्ता शिक्षा देने की पहल की जा रही है। डीईओ राजकुमार शर्मा ने बताया कि फिलहाल बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई को गुणवत्तापूर्ण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नए मूल्यांकन सिस्टम से स्कूल खुद को परखेंगे और अपने स्कूल को ग्रेडिंग देंगे। साथ ही स्कूलों के प्रधानाध्यापक ने स्कूल को परखने में कितनी ईमानदारी दिखाई है। इसकी क्रॉस चेकिंग विभागीय अधिकारियों की ग्रेडिंग और स्कूल के ग्रेडिंग के मिलान के बाद किया जाएगा।
बच्चों के स्वास्थ्य व शिक्षा का होगा आकलन
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सरकारी स्कूलों में ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। जिसका पूरा दारोमदार स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों पर होगा। इस व्यवस्था से स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार आएगा। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य और अभिभावकों की सहभागिता भी बेहतर शिक्षण व्यवस्था के लिए जरूरी है। इन सभी को मिलाकर स्कूल का ग्रेड तय होगा। स्कूलों के संसाधन का आकलन भी शिक्षक स्वयं करेंगे। हालांकि नई व्यवस्था कितनी उपयोगी साबित होगी। इसे देखना अभी बाकी है। क्योंकि अब तक सरकारी स्कूलों में खुद के मूल्यांकन को लेकर ईमानदारी की कोई परंपरा नहीं रही है। सरकारी स्कूलों में ग्रेडिंग सिस्टम लागू होने के बाद प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।

अभिभावकों की सहभागिता भी होगी जरूरी
स्कूलों में अलग अलग बच्चों की समझ अलग होती है और उसका व्यक्तित्व भी अलग होता है। उनकी क्षमता के अनुसार उसे शिक्षा देने की जिम्मेवारी शिक्षकों की है। इसके लिए जरूरी है कि शिक्षक बच्चों के बारे में जानकारी रखते हों। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य और अभिभावकों की सहभागिता भी बेहतर शिक्षण व्यवस्था के लिए जरूरी है। इन सभी को मिलाकर स्कूल का ग्रेड तय होगा। स्कूलों के संसाधन का आकलन भी शिक्षक स्वयं करेंगे। तभी जाकर गुणवतापूर्ण शिक्षा पर अमल होगा

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