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परेशानी:डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य महकमा, 90 की जगह कार्यरत हैं 67 चिकित्सक

गोपालगंज10 दिन पहले
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  • 19 अस्पतालों में रोजाना इलाज कराने पहुंचते हैं 4 हजार मरीज, आयुष चिकित्सकों के भरोसे चल रहे कई केन्द्र
  • गंभीर मरीजों को रेफर करना आम बात, लोगों को हो रही है भारी परेशानी

जिले का स्वास्थ्य महकमा डॉक्टर की कमी से जूझ रहा है। कई अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। यहां 26 लाख की आबादी की स्वास्थ्य की जिम्मेदारी 67 डॉक्टरों के भरोसे है। बता दें कि सदर अस्पताल सहित 14 प्रखंडों में 90 एमबीबीएस डॉक्टरों का पद सृजित है। लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण इतनी बड़ी आबादी का इलाज महज 67 चिकित्सकों के भरोसे रह गई है।

नतीजतन कई संस्थान आयुष चिकित्सकों के भरोसे चल रहे हैं। बता दें कि सिधवलिया के झझवां में 3.18 करोड़ से बने झझवा अस्पताल में चिकित्सकों की पोस्टिंग नहीं होने से 20 महीने से ताला लटका है। इतना ही नही चिकित्सकों की कमी के कारण कई एडिशनल पीएचसी भी बंद रहते हैं।

आयुष चिकित्सक करते हैं अंग्रेजी पैथ से इलाज
डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए आयुष चिकित्सकों का अनुबंध किया गया है। जिले के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 7 रेगुलर आयुष के चिकित्सक पदस्थापित हैं। इनमें अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिसई, लालाछापर, रामपुर, बथुआ, कोईनी,गौसियां और महम्मदपुर शामिल है।

इसके अलावा अन्य अस्पतालों में अनुबंध पर बहाल आयुष के 63 चिकित्सक हैं। इनमें आयुर्वेद, यूनानी और होमियोपैथ के चिकित्सक शामिल हैं। अहम बात यह है कि अस्पतालों में आयुष की दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आयुष के चिकित्सकों को अंग्रेजी दवा लिखनी पड़ती है। हकीकत है कि इस चिकित्सकों की पकड़ बीमारियों पर तो है लेकिन दवा की जानकारी अच्छी नहीं होने से बेहतर इलाज नहीं दे पाते।

बंद है एडिशनल पीएचसी बलरा
एडिशनल पीएचसी बलरा का भवन दो साल से तैयार है। छह बेड और 10 कमरे वाले इस अस्पताल का भवन 1.11 करोड़ की लागत से बना है। बनने के दो साल से यह अस्पताल सेवा नहीं दे पा रहा है। नतीजतन अस्पताल परिसर लोगों का खलिहान बना है।

बता गया कि डॉक्टर और कर्मचारियों की पोस्टिंग नहीं होने से यह महज टीकाकरण केन्द्र बनकर रह गया है। यहां एएनएम मालती कुमारी कैंपस में टीकाकरण करती देखी गई। इस एडिशनल पीएचसी की सेवा वहाल नहीं होने से बरौली प्रखंड के बलरा, अमरपुरा, सलेमुपर, हसनपुर व रामपुर पंचायत की करीब की करीब 70 हजार की आबादी को नजदीकी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है।

अनधीकृत रूप से अनुपस्थित चल रहे चिकित्सक
जिले में पदस्थापित 9 डॉक्टर बिना छ़ुट्टी और बिना विभागीय सूचना के लंबे समय से गायब हैं। तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने फरार चल रहे चिकित्सकों पर विभागीय कार्रवाई कर रखी थी। लंबे समय बीतने के बाद भी अनुपस्थित चिकित्सक सेवा में नहीं लौटे हैं।

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