मानवता:उच्च विचार व सद्-आचरण ही सच्ची मानवता : बाबा राजदेव

गोपालगंज9 महीने पहले
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देवता व दानव होना उतना मुश्किल कार्य नहीं है जितना कि मानव होना। महामानव व दानव समाज से भिन्न होते हैं लेकिन मानव का संबंध समाज से होता है।मानव को समाज व प्रकृति-प्रदत्त कष्टों, तकलीफों, यातनाओं व विभिन्न संघर्षों से प्रतिदिन जूझना होता है। जिसमें उसकी अच्छाई व बुराई की परख होती है जो विभिन्न तकलीफों से गुजरने के बावजूद भी सत्य-पथ पर अटल रहता है वही मानव है, सिर्फ शरीर मिल जाने भर से कोई मानव नहीं हो सकता। इसके लिए उसे महामानव व दानव के बीच का रास्ता अपनाकर कठोर सत्यकर्म करना होता है।

उसके वही कठोर कर्म सच्ची मानवता कही जाती है। बेईमानी, चोरी, लूट, डकैती, हत्या, धोखा, झूठ आदि सच्चे मानव के लक्षण नहीं हैं।ऐसे दुर्गुणों से मानव को दुःखों के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हो सकता। ये बातें विश्वशान्ति के उद्देश्य से माधवालाल मठिया गांव के सेवाश्रम में आयोजित भजन-कीर्तन व सत्संग में जुटी संतों की जमात के बीच बाबा राजदेव दास ने कही। इस अवसर पर भक्तों व श्रद्धालुओं सहित ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी।संतों व श्रद्धालुओं की सेवा व भंडारे की व्यवस्था में समाजसेवी व व्यवसायी रामसेवक उर्फ तूफानी, श्रीकांत बाबा, रामेश्वर व्यास, रामजीत भगत, हाकिम व्यास, अनिरुद्ध व्यास, जगजीवन लाल, प्रिंस कुमार आदि थे।

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