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लाॅकडाउन का असर:मूवमेंट हुई कम तो 55 फीसदी कम हुआ संक्रमण, 24 घंटे में सबसे कम 76 नए केस

गोपालगंज23 दिन पहले
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  • अब सिर्फ 534 केस एक्टिव बचे हैं, जिनका घर व अस्पतालाें में चल रहा इलाज

आज लॉकडाउन का 25वां दिन है। संक्रमण की चेन तोड़ने में लॉकडाउन कारगर साबित हुआ है। इससे कोरोना के नए केसों में काफी कमी आई है। परिणाम स्वरूप रविवार काे जिले में राहत भरी खबर सामने आई। पहले के मुकाबले अब काेराेना संक्रमण 55 फीसदी कम हुआ है।

बीते 24 घंटे में जिले में सिर्फ 76 नए केस मिले, जाेकि 25 मई के बाद एक दिन में मिलने केसाें का सबसे कम आंकड़ा है। कोविड जांच केन्द्रों पर सिर्फ 4 फीसदी सैंपलाें की रिपाेर्ट ही पाॅजिटिव मिली है। वहीं, लाॅकडाउन के पहले दिन 5 मई की बात करें ताे उस दिन जिले में 315 केस आए थे।

अगर इसी तरह एहतियात का पालन करेंगे ताे जिले में वाे दिन दूर नहीं जब फरवरी-मार्च जैसी स्थिति में पहुंच जाएंगे। यानी कई दिनों तक काेई नया केस नहीं मिलेगा। जिले में अब कुल केसाें का आकड़ा 15 हजार 463 पर पहुंचा है। दूसरी लहर की बात करें तो पहली अप्रैल से कल तक 59 दिनों में 9 हजार 955 केस मिले हैं वहीं, 94 फीसदी केसाें की रिकवरी भी हाे गई है। दो महीने के भीतर 134 केसाें सहित जिले में अब तक 9 हजार 366 केसाें की रिकवरी हाे चुकी है। अब सिर्फ 534 केस एक्टिव बचे हैं, जिनका घर व अस्पतालाें में इलाज जारी है।

संक्रमण का टूटने के ये तीन कारण
लाॅकडाउन का असर, मूवमेंट कम हुई : लाॅकडाउन के कारण लाेगाें काे बाजाराें और दुकानाें सहित अन्य जगहाें पर मूवमेंट कम हुई। आपसी संपर्क कम हुई ताे काेराेना की चेन भी टूटी। 95 फीसदी लाेगाें ने घराें से बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल किया और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी किया।

सैंपलिंग व एंटीजन टेस्ट बढ़ी
जिले में काेराेना काे ट्रेस करने में सबसे बड़ा हथियार सैंपलिंग है। पिछले 30 दिनाें की ही बात करें ताे जिले में सैंपलिंग का ग्राफ काफी बढ़ा है। खासकर एंटीजन टेस्ट का दायरा बढ़ा गया। एंटीजन जांच में लक्षण मिलते ही लोगों को तत्काल आइसोलेट कर ट्रीटमेंट शुरू कर दी गई। इससे वायरस को नया इंसानी शरीर मिलना बंद हो गया।
लोगों ने समझी जिम्मेदारियां
जेनरल फिजिशियन डाॅ. पीके तिवारी ने बताया कि जब दूसरे जगहों से मरीजों की गंभीर स्थिति, ऑक्सीजन की कमी व मौत की खबरें मिलने लगी तो लोगों में सुरक्षा को लेकर डर बनने लगा। सुरक्षा और सावधानी को लेकर लोग अपनी जिम्मेदारियां समझने लगे। इसे लाेगाें ने पिछले तीन सप्ताह में काफी हद तक समझा। काेराेना के बढ़ते केसाें से लाेग डरे भी। डर के कारण ही सही लाेगाें ने डबल-डबल मास्क का इस्तेमाल किया।

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