पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सतर्क रहें:तीसरी लहर की तैयारी: जिले में बच्चों के लिए बनाया 10 बिस्तर का वार्ड, 20 बेड और लगेंगे

गोपालगंज13 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • विशेषज्ञ बोले- ऐसी नौबत ही क्यों आने दें?...बच्चों को बताएं संक्रमण से बचाव करने के तरीके
  • तीसरी लहर से बच्चों का डराना नहीं, बचाना है...इसलिए जागरूकता के साथ नियम पालन करने की आदत लगाएं

जिले में कोरोना की दूसरी लहर अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। अब चर्चा तीसरे लहर की शुरू हो गई है। विशेषज्ञों द्वारा इसमें बच्चों के संक्रमित होने की संभावना जताई जा रही है। नतीजतन स्वास्थ्य विभाग ने तीसरी लहर की संभावना को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है।

कारण कि पहले से मुकम्मल तैयारी नहीं रहने के चलते दूसरी लहर लोगों को दोगुना जख्म दे गया। अब तीसरी लहर की बात भले ही संभावना है, लेकिन जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग इसको किसी भी सूरत में हल्के में लेने को तैयार नहीं हैं। कोरोना की तीसरी लहर को लेकर अस्पतालों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। सदर अस्पताल प्रशासन ने 10 बेड का वार्ड खासकर छोटे बच्चों के लिए तैयार कर दिया है। वार्ड में 20 बेड बढ़ाने की तैयारी कर ली गई है, ताकि तीसरी लहर की नौबत आने पर बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा व उपचार मिल सके। सिविल सर्जन डाॅ. योगेन्द्र महतो ने बताया कि इस वार्ड में बेड वार्मर, दवाइयां, ऑक्सीजन तक की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। अन्य बेड की भी जरूरत पड़ती है तो उसके लिए भी अस्पताल में पूरी तैयारी है।

14 साल तक के 6.68 लाख बच्चे

बता दें कि कोरोना के दूसरी लहर में 8 बच्चे आंशिक रूप से संक्रमित हुए थे। इनमें सभी स्वस्थ हो चुके हैं। फिलहाल बच्चों में कोरोना का एक भी केस एक्टिव नहीं है। जिले में 0 से 5 वर्ष के 3 लाख 17 हजार, 6 से 11 साल के 2 लाख 31 हजार व 12 से 14 साल के 1 लाख 20 हजार बच्चे हैं।

दुरूस्त हुए सभी वार्मर

सीएस डॉ. योगेन्द्र महतो ने बताया कि सदर अस्पताल के एसएनसीयू में लगे सभी वार्मर सेवा में हैं। बता दें कि यहां कुल 14 वार्मर बेड है। इनमें से 6 मशीन खराब थे।

नौबत ही नहीं अाए...इसलिए, सतर्कता पहले जरूरी : डॉ. कृष्णा

सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा की मानें तो लोग सतर्कता बरतें तो थर्ड वेव की नौबत ही नहीं आएगी। अगर परिस्थितियां वैसी आती है तो हमें अलर्ट रहन होगा। बच्चों को तीसरी लहर के नाम से डराने की जरूरी नहीं हैं। उनका बचाव करना है। बच्चों को कोरोना के संक्रमण से बचाव के तरीकों के बारे में बताना होगा। उनमें सुरक्षा की आदत डलवाएं। संक्रमण से बचाव के जो तरीके वयस्कों के लिए है, वहीं बच्चों पर भी लागू होता। हां, लक्षण हाेने पर बच्चों के मामले लापरवाही कमई ना करें। तुरंत जांच व इलाज कराएं।

वेंडीलेटर ऑपरेट करने के लिए एनेस्थेसिस की मांग

गहन चिकित्सा के लिए सदर अस्पताल में 6 वेंडीलेटर लगाए गए हैं। हालांकि ऑपरेटर की कमी के कारण दूसरी लहर में कोरोना के गंभीर मरीजों को वेंडीलेटर की सेवा नहीं मिल पाई थी। अगस्त तक तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए सीएस ने राज्य स्वास्थ्य समिति व विभाग के आला अफसरों को पत्र लिख कर एनेस्थेसिस की मांग की है ताकि सभी वेंडीलेटर चालू रहे।

बचाव के साथ अच्छी डाइट भी जरूरी : डाइटिशियन

​​​​​​​महेन्द्र महीला कॉलेज के गृह विज्ञान की प्रोफेसर व डाइटिशियन डॉ. अंजू कुमारी ने बताया कि बच्चों के आहार के प्रति ज्यादा जागरूक रहने की जरूरत है। संतुलित व पौष्टिक आहार बच्चों में रोग प्रतिराेधक क्षमता को बढ़ाता है। बच्चों को ताजा और सुपाच्य भोजन कराएं। कोरोना काल में उनकी डाइट को अच्छी रखने के लिए निम्न टिप्स को आजमाया जा सकता है।

एक्सपर्ट व्यू: तीसरी लहर के लिए अभी से तैयारी जरूरी

चिकित्सक डॉ. बीपी सिंह व डॉ. पीके तिवारी के अनुसार कोरोना तीसरी लहर से बचने के लिए पहले से ही सावधान होने की जरूरत है। इसके लिए कुछ योजनाएं पहले से बनानी होगी। इसके लिए तीन बातों पर ध्यान होगा।

  • 1- अनलाॅक से पहले सोचना होगा: लॉकडाउन की वजह से ही जिले में दूसरी लहर के केस कम हुए है। ऐसे में अगर प्रतिबंधों को हटाया जाए तो प्रशासन को इसके विकल्प के बारे में उपाय करने होंगे।
  • 2- वैक्सीनेशन में तेजी : गांवों में जागरूकता की कमी से वैक्सीनेशन तेजी से नहीं हो पा रहा। इसमें तेजी लानी होगी। इसलिए लोगों मन में उठ रही सभी शंकाओं को दूर कर टीकाकरण पर जोर देना होगा।
  • 3- प्रोटोकॉल पर सख्ती : तीसरी लहर की नौबत ही नहीं आए, इसके लिए कोविड प्रोटोकॉल के अनुपालन में सख्ती बरतनी होगी। चेतावनी को गंभीरता से लेना होगा।
खबरें और भी हैं...