खुशहाली:गन्नांचल में कतरनी भी बना रही पहचान ....महंगे चावलों का बढ़ रहा है उत्पादन

गोपालगंज2 महीने पहले
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खेतों में लहलहा रही धान । - Dainik Bhaskar
खेतों में लहलहा रही धान ।
  • 30% कतरनी चावल के पैदावार की संभावना, लोकल उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

अभी तक देश-प्रदेश में जिले की ख्याति गन्नांचल के नाम से है। यहां के निर्मित शक्कर और गुड़ की मिठाई विदेशों तक पहुंच चुकी है, लेकिन किसानों की मेहनत और तकनीकी खेती की बदौलत जल्द ही एक नई पहचान बनने वाली है। शक्कर की मिठास के साथ कतरनी भात की महक भी हमारी पहचान बन सकती है। पारंपरिक खेती से इतर कई किसानों ने व्यवसायिक फसलों पर फोकस किया है। नतीजतन खेती अब बढ़िया मुनाफा देने लगी है। बात करें धान की खेती की तो यहां साल-दर-साल कतरनी चावल का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।

इस बार संपूर्ण खेती के लक्ष्य के विरूद्ध किसानों ने 30% बासमती धान की रोपाई की है। मौसम व बारिश के अनुकूल होने से फसल भी लहलहा उठी है। ऐसे में इस साल कतरनी चावल की बंपर पैदावार मिलने की उम्मीद है। कृषि विभाग की मानें तो इस बार 70 हजार टन कतरनी चावल का उत्पादन हो सकता है। बता दें कि जिले में 88,000 हजार हेक्टेयर धान की खेती के लक्ष्य के विरूद्ध इस बार 85 हजार 260 हेक्टेयर में ही धान की रोपनी हो सकी है। विभाग द्वारा उत्पादन का लक्ष्य 2.40 हजार मे.टन रखा गया है।

पक रही कतरनी
मानसून के समय पर आने ले इस बार खेती भी समय पर हुई है। पहला मौका है जब जुलाई में ही 90% धान की रोपाई पूरी हो गई थी। फसलों में ग्रोथ अच्छी है। कृषि विभाग की मानें को पिछले साल की तुलना में इस बार प्रति एकड़ 10 फीसदी ज्यादा पैदावार हो सकता है। धान की जड़ों में पानी जमा रहने से कल्ले भी ज्यादा निकलें हैं। कतरनी धान की फसल को अब पकने लगी है।

उत्पादन बढ़ने से महंगे चावलों की कम हो रही आवक
जिले में चावल का लोकल उत्पाद बढ़ने से महंगे व महीन चावलों की आवक में कमी आई है। इससे चावलों के दाम में भी गिरावट आने की संभावना है। पिछले कुछ वर्षों से सुखाड़ के चलते चावल का उत्पादन कम होने से बाहरी आवक बढ़ गया था। इससे लोगों का बजट बिगड़ जाता था। पिछली बार से उत्पादन के लिए अनुकूल मौसम होने से उत्पादन बंपर है और लोगों को कुछ हद तक राहत मिलने लगी है।

मौसम का साथ ... औसत से 10% ज्यादा बारिश|जिले में इस साल 1020 मिलीमीटर सामान्य वर्षापात के मुकाबले अब तक 1142.5 एमएम बारिश हुई है। यह सामान्य से 10.3% ज्यादा है। अभी सितंबर के चार दिन व अक्टूबर में हथिया नक्षत्र की बरसात बाकी है। अक्टूबर महीने का सामान्य वर्षापात 52.3 एमएम है।

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