पलायन से आ रहा कोरोना!:गोपालगंज में कोविड गाइडलाइन की धज्जियां उड़ी, मजूदर बोले- दूसरे राज्यों में फंसना नहीं चाहते, इसलिए लौटे

गोपालगंज7 महीने पहले
बस के बाहर लगी भीड़।

गोपालगंज में कोरोना की तीसरी लहर रफ्तार पकड़ रही है। लुधियाना, गुजरात, दिल्ली, जैसे शहरों में रोजी रोटी के लिए गए यहां के मजदूरों में लॉकडाउन का भय भी बढ़ता जा रहा है। पंजाब, हरियाणा, और दिल्ली से एक बार फिर प्रवासी मजदूर अपने घरों की ओर बेतहाशा भाग रहे हैं। रविवार को गोपालगंज में यूपी-बिहार की बॉर्डर पर मजदूरों के पलायन की तस्वीरें फिर सामने आने लगी हैं। भीड़ देखकर लगता है कोरोना का खतरा जल्द टलने वाला नहीं है। बाहर से आ रहे मजदूर काफी लापरवाह दिख रहे हैं। मजदूरों की भीड़ सभी बसों में दिख रही है।

कई मजूदरों के चेहरे पर न तो मास्क दिखा और न ही वे दो गज की दूरी का पालन कर रहे हैं। उन्हें घर जाने की जल्दी है। बाहर से अपने घर लौट रहे इन मजदूरों के चेहरे पर कोरोना महामारी और रोजी-रोजगार छूटने की चिंता दिख रही है। घर आनेवाले मजदूरों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। जिन्हे बस नहीं मिल रही, वे बस की फर्श पर बैठकर सफर कर रहे हैं। यही कारण है कि कोविड-19 गाइडलाइन का पालन यात्री नहीं कर रहे हैं। यहां पर हरियाण, पंजाब और गुजरात से आने वाले मजदूरों की तादाद रोजाना बढ़ती ही जा रही है।

बस के अंदर लगी भीड़।
बस के अंदर लगी भीड़।

बातचीत करने पर मजदूरों ने बताया कि इस बार वे पिछले लॉकडाउन की तरह दूसरे राज्यों में फंसना नहीं चाहते थे इसलिए जिस हाल में थे, घर लौट रहे हैं। बिहार के खगड़िया, बेगूसराय, अररिया और मुजफ्फरपुर के लिए हर रोज आ रही बसों पर सीट से अधिक लोग सवार हैं। मजदूरों की भीड़ सभी बसों में दिख रही है।

ट्रेन का टिकट नहीं मिला तो बस में टिकट लेकर आए

लुधियाना से लौटे मुजफ्फरपुर के जैनित खान ने बताया कि वे वहां परिवार के साथ रहते हैं। पैलेश में प्राइवेट नौकरी करते हैं। अभी हालत बहुत खराब होने लगी है। ट्रेन का टिकट नहीं मिला, जिसके बाद दो हजार रुपये बस का किराया देकर स्पीलर का सीट लिया, लेकिन बस वालों ने जेनरल सीट से भी बदतर इंतजाम कर बस में बैठाया।विरोध करने पर लाठी से मारा भी गया। कोविड का डर है, मगर क्या कर सकते हैं।

बस में भी जानवरों की तरह ठूंस-ठूंस कर यात्रियों को बैठाया गया

बेगूसराय के बखरी सलोना के रहनेवाले श्रमिक इंदल कुमार की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इंदल बताते हैं कि कोरोना के मामले नहीं कम हुए तो लॉकडाउन लगने के पूरे आसार दिख रहे हैं। ये सोचकर वापस लौट गए कि कहीं पिछली बार जैसा हाल न हो इसलिए समय रहते वहां से घर लौट गए हैं। बस में भी जानवरों की तरह ठूंस-ठूंस कर यात्रियों को बैठाया गया है। लुधियाना से लौट रहे खगड़िया के राजा राम कुमार बताते हैं इट-भट्ठा पर काम करते हैं. कोरोना की वजह से काम बंद हो गया। घर लौटने के लिए ट्रेन नहीं मिला। मजबूरी की वजह से बस से लौटना पड़ा रहा है।

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