कोरोना का असर / काराेबार घट गया,व्यवहार बदल गया,जमा पूंजी समाप्त हाे गई,अब फूंक-फूंक कर रख रहे कदम

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  • संक्रमण का भय और लॉकडाउन ने बदलकर रख दी लोगों दिनचर्या

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

गोपालगंज. काेराेना वायरस ने आम आदमी की जिंदगी पर गहरा असर डाला है। लॉकडाउन के कारण न केवल समूची कारोबारी गतिविधियां ठप हाेकर रह गईं है, बल्कि लोगाें के परस्पर व्यवहार और रिश्तों पर भी गहरा असर पड़ा है। लोगाें की दिनचर्या बदल गई है। कारोबारी व्यवहार बदल गया है। ग्राहक और दुकान मालिक के बीच का व्यवहार बदल गया है। भास्कर ने शनिवार काे आम लोगाें से इस बारे में जाना कि उनके जीवन में क्या बदलाव आया है। संजय पांडेय की रिपोर्ट...
दो माह से बंद पड़ी हुई है चाय-नाश्ते की दुकान
दानापुर निवासी सुभाष प्रसाद पोस्ट ऑफिस चौक पर चाय-नाश्ता की दुकान संचालित करते हैं। वे बताते हैं कि लॉकडाउन से पहले सुबह चार बजे से ही ग्राहक आना शुरू हो जाते थे। तब रात 8 बजे तक दुकानदारी चलती थी। रात 9 होने पर दुकान बढ़ाकर घर भी चले जाते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते दो माह पूरी तरह दुकान बंद रहने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। प्रशासन  की ओर से लॉकडाउन 4.0 में रियायत देने के बाद दुकान सुबह 10 बजे से खोला हूं, लेकिन ग्राहकी बिल्कुल नहीं है। प्रशासन के आदेश पर दुकान शाम 5 बजे बंद कर चले जाना है।  कोरोना वायरस के कारण न तो ग्राहक आते हैं और न ही मैं अब लोगों को दुकान पर बैठाता हूं। जिससे आमदनी पर असर पड़ रहा है। दुकान खोलने के साथ ही पहले भी सफाई की जाती थी, लेकिन अब सफाई के साथ सेनेटाइज कर रहा हूं। यही काम दुकान बंद करने से पहले भी करूंगा।
आधी से भी कम रह गई दूध की बिक्री, घर चलाना कठिन
शहर के निकटवर्ती गांव भीतभेरवा से दुकानों पर बरसों से दूध सप्लाई करने आ रहे राजू कुमार का कहना है कि लॉकडाउन ने जहां एक ओर जिंदगी के मायने बदले तो दूसरी ओर इसकी वजह से कई व्यापार पर इसका सीधा असर भी पड़ा। इन्हीं में से एक है दूध सप्लाई का व्यापार। पिताजी के समय से सप्लाई का काम चल रहा है। मगर ऐसा पहली बार हुआ जब दूध की बिक्री आधी से भी कम रह गई। इसकी वजह है कई लोगों का कोरोना के डर से दूध लेना ही बंद कर दिया है।  होटल व अन्य प्रतिष्ठान का बंद होने से कारोबार बंद करना पड़ा। ऐसे में लॉकडाउन से पहले जहां रोजाना 90 लीटर से अधिक दूध बेचते थे वहां आज 30-35 लीटर दूध भी नहीं बिक रहा। इसका असर गांव के उन पशुपालकों पर भी पड़ा जिनसे हम दूध खरीदते हैं। मजबूरी में हमें भी उनसे कम मात्रा में दूध लेनी पड़ रही है।
लॉकडाउन में खत्म हो गई जमा पूंजी, जीना मुश्किल
शहर के बंजारी के रहने वाले कपड़ा दुकानदार चंदन कुमार एक छोटे कोरोबारी हैं। सिनेमा रोड में दुकान चलाते हैं। पूरे परिवार में एक मात्र कमाने वाले सदस्य हैं। लॉकडाउन के बाद 22 मार्च से न सिर्फ लग्न की बिक्री मार खई अपितु त्योहारों की कमाई भी ठप रही। अब लग्न और त्योहार दोनों समाप्ति की ओर हैं। ऐसे में 4 महीने और तकलीफ डठाने पड़ेंगे। दो महीने से दुका बंद थ। संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान परिवार के साथ ही घर में रहे। पूरे साल में चैत्र नवरात्री, ईद और लग्न के सीजन का इंतजार रहता है। इसी पर पूरे साल की इनकम निर्भर होती है, लेकिन इस बार कुछ नहीं हो सका। जो जमा पूंजी थी वह भी लगानी पड़ी। किराए की मकान और दुकान की राशि जमा करवानी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि अभी तो मामूली छूट मिली है। ग्राहक भी दुकान पर नहीं आ रहे हैं।  ऐसे में आने वाले दिनों में भी राहत की उम्मीद नहीं है।

महीने की कमाई साल भर खाते हैं, पूरा साल गया
शहर से 5 किमी दूर बसडीला बाजार के टेंट व्यवसायी पवन चौरसिया का दर्द कुछ अलग है। उन्होंने लग्न का 36 सट्‌टा किया था। सभी पीट गए। शदी-व्याह रूक गए। सट्टा करने वाले लोग बेयाना तक मांग रहे है। उन्होंने बताया कि टेंट का कारोबार 4 महीने का है। यहां कमाई साल भर बैठकर पूरा परिवार खाता है। चाैथे चरण के लॉकडाउन में छूट मिलने से उनके कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। लोग शादी-विवाह का डेट बढ़ाकर नवंबर में ले गए हैं। अगर जून में लॉकडाउन पूरी तरह से खुलता भी है तो लग्न पर डिपेंड रहने वाले अन्य कारोबारी जैसे कैटरीन, सजावट करने वाले, बैंड-बाजा, डीजे आदि पर आजीविका चलाने वालों को अभी छह महीने इंतजार करना होगा। इतने दिन में महाजन का कर्जा बढ़ जाएगा। आने वाला दिन और कठिन हो जाएगा।

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