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खेतीबाड़ी:जैविक खेती के उपयोग से मिट्टी की संरचना में आता है सुधार, खेत की बढ़ती है उपजाऊ शक्ति

गोपालगंज16 दिन पहले
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खेतों में फसल की देखरेख करते किसान। - Dainik Bhaskar
खेतों में फसल की देखरेख करते किसान।
  • जैविक खेती जमीन और जीवन दोनों के लिए जरूरी, जैविक खेती से पैदावार अधिक होने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी
  • रासायनिक उर्वरकों कीटनाशकों के स्थान पर कुदरती खाद का प्रयोग

जिले में किसान बड़े पैमाने पर अभी भी रासायनिक खेती कर रहे हैं, ऐसा वे इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इन्हें लगता है कि रासायनिक खेती से खेतों में लगी फसल की पैदावार अधिक होगी,पर ऐसा नही है। इससे किसानों के खेतों की उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे कम ही हो रही है, फिर भी जानकारी के अभाव में किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर नहीं हो रहे हैं। जैविक खेती से उत्पादित फसलों में सड़ने और गलने की दर रासायनिक खाद के मुकाबले मंद होती है। यानी फल हो या सब्जी, जल्दी गलते और सड़ते नहीं हैं। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए ज्यादा समय मिलता है।जैविक खेती का दीर्घकालीन सकारात्मक प्रभाव भी है। खेती की गुणवत्ता को बनाये रखने में यह कारगर है।
जैविक खेती से भूमि की पैदावार शक्ति बनी रहती
कृषि विभाग का मानना है कि जिले के किसान अगर रासायनिक खेती को छोड़कर जैविक खेती की ओर अग्रसर होंगे तो उनके खेतों में लगी फसलों की पैदावार भी अधिक होगी जबकि भूमि की उपजाऊ क्षमता भी लंबे समय तक बरकरार रहेगी। यही नहीं जैविक खेती से पैदावार अधिक होने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और किसान आर्थिक तौर पर सुदृढ़ हो सकेंगे। इस संबंध में कृषि विभाग के जानकारों की मानें तो जैविक खेती से न केवल भूमि की पैदावार शक्ति बनी रहती है बल्कि पर्यावरण भी संतुलित रहता है। उधर आत्मा निदेशक ने बताया है कि किसान पशुओं के गोबर और मूत्र से जैविक खाद तैयार कर सकते हैं।

पशुपालन को बढ़ावा दें और खुद तैयार करें जैविक खाद
जिला उद्यान सहायक निदेशक नेयाज अहमद ने बताया कि जिले के किसान खेती के साथ पशुपालन को बढ़ावा देकर जैविक खाद की तैयारी खुद कर सकते हैं। रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से जल मिट्टी वायु प्रदूषित हो रहा है जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ रहा है जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों कीटनाशकों के स्थान पर कुदरती खाद का प्रयोग जैसे गोबर की खाद हरी खाद जीवाणु कल्चर के अलावा बायोपेस्टिसाइड व बायो एजेंट जैसे क्राइस्ट इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है, इससे न केवल भूमि की पैदावार लंबे समय तक बनी रहेगी, बल्कि पर्यावरण भी संतुलित रहेगा।

जैविक खाद से कम लागत में अधिक उत्पादन होता है
जानकारों का मानना है कि जिन किसानों का यह मानना है कि रासायनिक खेती से अधिक पैदावार होती है ऐसा नहीं है, अगर वह अपने खेतों में लगे फसलों में जैविक उर्वरक का इस्तेमाल करें तो पैदावार अधिक होगी जबकि उनका खर्च भी रासायनिक खेती से कम आएगा। जिले के किसानों में शामिल सुनील चौरसिया,कन्हैया चौधरी, इंद्रदेव भगत, दिलीप ठाकुर, रमेश सिंह सहित कई किसानों ने बताया है कि अगर किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जाए तो किसान जागरूकता के बाद जैविक खेती को अपना सकेंगे।

जैविक खेती से किसानों को लाभ ही लाभ
जैविक खेती के कई लाभ हैं। इससे खेत और किसान दोनों आत्मनिर्भर होते हैं। यानी अगर आपने जैविक खेती शुरू की है, तो कुछ ही सालों में आपके खेत की उत्पादक क्षमता का स्वाभाविक विकास इतना हो जाता है कि बहुत अधिक पानी और खाद की जरूरत नहीं रह जाती। किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता घट जाती है। चूंकि किसान खुद खाद तैयार कर सकते हैं, इसलिए उन्हें सरकार और खाद आपूर्तिकर्ताओं पर आश्रित नहीं रहना पड़ता है। चूंकि जैविक खेती सस्ती है।

किसानों को ऐसे मिलती है जैविक खेती से लाभ
जैविक खेती से भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है
कम अंतराल पर सिंचाई नहीं करनी पड़ती है
रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो जाती है
कम लागत में बेहतर उपज
जैविक खेती पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। यह पर्यावरण और जैव विविधता के लिए अनुकूल है
जैविक खेती से भूमि के जल स्तर में वृद्धि होती है
यह जल और मिट्टी के माध्यम से होने वाले प्रदूषण में कमी लाती है
इसमें खाद बनाने के लिए कचरे का उपयोग होता है। इससे कचरा प्रबंधन भी हमें मदद मिलती है।

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