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थोड़ी राहत:गंडक के जलस्तर में रोजाना उतार-चढ़ाव की है स्थिति

गोपालगंज2 दिन पहले
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सड़क बनाने के लिए प्रदर्शन करते लोग - Dainik Bhaskar
सड़क बनाने के लिए प्रदर्शन करते लोग
  • नीचले हिस्से वाले गांवों में अभी जमा है बाढ़ का पानी, संक्रमण का डर

नेपाल में पिछले दो दिनों से रूक-रूक कर मध्यम दर्जे की बारिश हो रही है। इस कारण नदी के जलस्तर उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी है। मंगलवार की शाम से वाल्मीकि नगर डैम से पानी का डिस्चार्ज कुछ बढ़ गया है। हालांकि अभी नए इलाकों में पानी फैलने का खतरा नहीं है। सदर प्रखंड के रामनगर, मांझा के निमुईयां, सिधवलिया के बंजरिया व बैकुंठपुर के पकहां में पानी का बहाव हो रहा है। वही कई प्रभावित इलाकों से पानी उतर रहा है। पांचो प्रखंड के करीब 28 गांवों में अभी बाढ़ का घरों के आसपास जमा है। उधर 5 दिन पहले एक मीटर नीचे उतर चुकी गंडक की धारा में 8 से 10 सेटी मीटर तक रोजाना उतार-चढ़ाव हो रहा है। बीते 24 घंटे में नदी का लेवल 8 सेंटीमीटर बढ़ गया है। बराज से बुधवार को 1 लाख 66 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
खतरे के निशान से नीचे है नदी
जिले में गंडक नदी खतरे के निशान से काफी नीचे है। सदर प्रखंड के पतहरा व मशान थाना में नदी का स्तर में लाल निशान से 32 सेटी मीटर नीचे बह रही है। बैकुंठपुर के मूंजा में खतरे के निशान से 26 सेमी नीचे है।

पतहरा व मशान थाना में नदी का स्तर में लाल निशान से नीचे

आज पहुंचेगा डिस्चार्ज
वाल्मीकि नगर डैम से छोड़े पानी को जिले की सीमा में पहुचने में 15 से 16 घंटे का समय लगता है। गंडक नदी में 1.66 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज छोड़ा गया है। नया पानी गुरुवार की सुबह 10 बजे से जिले की गंडक सीमा में प्रवेश करेगी। इससे जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है।

बीमारियां फैलने की आशंका
कई गांवों में बाढ़ का पानी जमा होकर सड़ने लगा है। पानी के सड़न व संक्रमण से अन्य बीमारियों की आशंका से ग्रामीण सहम गए हैं। नदी के निचले हिस्से के बसावटों में दवा का छिड़काव नहीं होने से डायरिया व मच्छरजनित बीमारियां पांव पसार रही है।

कटाव को लेकर पेट्रोलिंग तेज
घटते जलस्तर को देखकर बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की चिंता अब कटाव को लेकर बढ़ गई है। प्यारेपुर से लेकर डुमरियाघाट तक 26 किलोमीटर तटबंधों पर कटाव की स्थिति जानने के लिए पेट्रोलिंग तेज कर दी गई है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता सचिन कुमार ने बताया कि नदी के जलस्तर में काफी कमी आई है। ऐसे में कटाव का खतरा बढ़ जाता है।

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