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किसानों की मेहनत पर फिरा पानी:बालियों में पीले रंग की पड़ रही है गांठ, फसल बर्बाद होने से उड़ी किसानाें की नींद

गुठनीएक महीने पहले
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  • दवा का छिड़काव कर फसल बचाने की कोशिश

गुठनी प्रखंड के ओदिखोर गांव निवासी किसान बसंत शर्मा ने बताया कि बारिश से उबरी पछेती धान की प्रजाति अब हल्दिया रोग (कंडुआ) से प्रभावित हो गयी है। चितित किसान इससे उबरने के तरीके निजी कृषि परामर्श केंद्रों खोज रहे हैं। बताई दवाएं का छिड़काव भी कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

चिताखाल पंचायत के केलहरुआ गांव निवासी किसान सत्येंद्र सिंह ने कहा कि मेरे गाँव सहित अधिकतर गांवों में धान की फसल में यह रोग फैल चुका है। किसानों ने काफी मेहनत कर इस बार धान की फसल को सहेजा। बाली निकलने को आई तो आफत की बारिश शुरू हो गई। और जब धान पकने को आया तो कंडुआ रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। हालांकि इससे बचने के लिए किसानों ने कृषि विभाग की सलाह के मुताबिक खाद व कीटनाशी का प्रयोग किया था। लेकिन कंडुआ रोग से सूखती धान की फसलें देखकर किसान परेशान हैं। कृषि अध्यक्ष सह किसान बलुआ पंचायत के किसुनपुरा गांव निवासी दिनेश यादव ने बताया कि धान की फसल पहले झुलसा व खैरा रोग की चपेट में रही। फसल पकने की अवस्था में पहुंची तो कंडुआ रोग ने इसे अपनी चपेट में ले लिया।

धान की बालियों में पीला-पीला गांठदार का आकार बन जा रहा है। बालियों में दाने मर जा रहे हैं। पौधों को झाड़ने से हल्दी की तरह पाउडर उड़ रहा है। बरपलिया गांव निवासी किसान गोपाल यादव ने बताया कि यह विमारी लगभग गुठनी प्रखंड सभी गांवों के किसानों के धान की फसल को प्रभावित किया है।

कई किसान तो खून के आंसू रो रहे हैं। उनको समझ में नहीं आ रहा कि अब फसल को कैसे बचाएं। कृषि विभाग के समन्वयक आरपी चंद ने बताया कि किसान अपने धान कि फसल में हेक्सा कोमोजोल एक एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करेंने से लाभ होगा।

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