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उदासीनता:हसपुरा में नहर फाॅल ध्वस्त रहने से 10 हजार बीघा जमीन फिर रह जाएगी परती

हसपुरा24 दिन पहले
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  • फॉल नहीं होने के कारण नहर का वाटर लेबल नालियों तक नहीं पहुंच पा रहा

नहरों में पानी रहते हुए भी किसानों के खेत पानी के लिए तरस रहें है।विभागीय लापरवाही के कारण इस वर्ष भी 10 हजार बीघा उपजाऊ भूमि परती रह जायेगा।दाउदनगर - कोचहासा लाइन नहर में हसपुरा प्रखंड के पहरपुरा पुल के पास मकबुलपुर नहर फॉल को लगभग 15 वर्ष पूर्व उड़ाही के दौरान ध्वस्त कर दिया गया।जिसके बाद से ही आसपास के ग्रामीण फॉल निर्माण की मांग कर रहें है।दर्जनों बार आंदोलन किया प्रखंड कार्यालय का घेराव किया लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।आज से 150 वर्ष पहले अंग्रेजी हुकूमत के समय बने इस फॉल को ध्वस्त हो जाने के कारण इलाके के सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन बंजर हो गया।फॉल नहीं होने के कारण नहर का वाटर लेबल नालियों तक नहीं पहुँच पा रहा है। नालियों के जरिये ही खेतों तक पानी पहुचता था।

दाउदनगर से कोचहासा तक दर्जनों नालियां अस्तित्व में है लेकिन उनमें पानी का बहाव नहीं है।अकेले मकबूलपुर सात नालियां है।जिससे पीरू ,गहना, गुलरिया बिगहा, गवसपुर समेत दर्जनों गांवों के खेतों तक पानी पहुंचता था।इस बार 25 जून को रोहन नक्षत्र चढ़ने से पहले ही ग्रामीणों ने फॉल निर्माण के लिए विभागीय कार्यालय व जनप्रतिनिधियों के पास चक्कर लगा रहें है।इसी क्रम में तीन जून को प्रखंड कार्यालय का घेराव भी किया था तो अधिकारियों ने रोहन से पहले फॉल निर्माण का आश्वासन दिया था लेकिन आद्रा नक्षत्र समाप्ति के बाद भी फॉल नहीं बन सका।

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