शिक्षा का हाल:सत्र के 12 में से 9 महीने बीते, 25 प्रतिशत स्कूली बच्चों के पास अब भी किताबें नहीं

जहानाबाद2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • सुस्ती बरत रहे दो सौ से अधिक प्रारंभिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का डीईओ ने रोका वेतन

वर्तमान शैक्षणिक सत्र की समाप्ति को अब कुछ ही महीने बचे हैं, लेकिन जिले के कई स्कूलों में अब तक किताब की खरीद नहीं हो सकी है। इससे जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह से बाधित हाे रही है। दरअसल इस त्रासदी के पीछे स्कूलों व संबंधित अधिकारियों की शिथिलता को प्रमुख वजह माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार जिले के लगभग पच्चीस प्रतिशत स्कूलों में अब भी पचास प्रतिशत भी पुस्तकों की खरीद नहीं हो सकी है। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले के लगभग नौ सौ प्रारंभिक स्कूलों में से 204 में अब भी 50 फीसदी पुस्तक की भी खरीदारी नहीं की गई है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी रौशन आरा ने इस पर कड़ा रूख अख्तियार करते हुए संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का वेतन पर राेक लगा दी है। दरअसल शैक्षणिक सत्र 2021-22 के अंतर्गत राज्य के सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नामांकित सभी छात्र छात्राओं को पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने के लिए राशि हस्तांतरित किया जा चुका है। इस के लिए कई बार निर्देश भी निर्गत किए जा चुके हैं बावजूद कई विद्यालयों में पुस्तक क्रय की प्रक्रिया बहुत ही धीमी है।

900 प्रारंभिक स्कूलों में से 204 में अब भी 50% पुस्तक की नहीं हो सकी खरीदारी

बरती जा रही शिथिलता
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने माना है कि निर्देश के बावजूद पुस्तक खरीद में शिथिलता बढ़ती जा रही है। उन्होंने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 50 प्रतिशत से कम उपलब्धि वाले प्रधानाध्यापकों का वेतन स्थगित कर दिया है। उन्होंने कहा है कि शत प्रतिशत पुस्तक क्रय होने के बाद ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया की जाएगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी एवं राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी को भी दी है।

अभिभावकों व संबंधित बच्चों को शैक्षणिक भविष्य को ले बढ़ी चिंता
बारह महीने में नौ महीने बिना किताब के पढ़ने वाले बच्चों व उनके अभिभावकों की चिंता काफी बढ़ गई है। आने वाले कुछ दिनो में परीक्षाएं होने वाली है। परीक्षा को लेकर बच्चों की तैयारी किताब के बगैर कमजोर हो रही है। वास्तव में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ज्यादातर गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्हें किताब के लिए सरकार पर आश्रित रहना मजबूरी है। इसके अलावा कोरोना की वजह से अधिकांश समय स्कूल बंद रहे हैं। जिले के अधिकांश ग्रामीण स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन क्लासेज की सुविधा भी नहीं मिली है। ऐसे में जाहिर तौर पर उनके शैक्षणिक हालात व मजबूरी को समझा जा सकता है। दरअसल किताब खरीद को लेकर सरकार की नीति से अभिभावकों का एक बड़ा वर्ग चिंतित है। उनका कहना है कि अगर सरकार की नीति ईमानदार होती तो उनके बच्चों को किताब के लिए पूरा सेशन इंतजार नहीं करना पड़ता। किताब के बिना बच्चों को पढ़ाई कैसे कराई जाए, अभिभावकों की समझ से परे लगता है।

मखदुमपुर प्रखंड के सबसे अधिक 83 स्कूलों में किताब की खरीद में ढिलाई
विभागीय जानकारी के अनुसार हुलासगंज प्रखंड के 27, रतनी फरीदपुर प्रखंड के 9, मखदुमपुर प्रखंड के 83, काको प्रखंड के 57 एवं घोसी प्रखंड के 34 विद्यालयों के द्वारा 50 प्रतिशत से कम पुस्तक की खरीद की गई है। सदर प्रखंड के भी कई स्कूलों में किताब खरीद की स्थिति ठीक नहीं है। जांच के बाद एक बार फिर से डीईओ पूरे मामले की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई करेंगी। उन्होंने बताया कि पहले ही कोरोना की वजह से बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई है लेकिन अब किसी स्तर से इसमें शिथिलता जरा भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर आगे शिथिलता जारी रही तो संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

खबरें और भी हैं...