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धर्म-समाज:19 वर्ष बाद लग रहा है अश्विन महीने में मलमास 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा इसका प्रभाव

जहानाबाद7 दिन पहले
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  • इससे पहले 1901 में अश्विन महीने में लगा था अधिमास, पूजा पाठ से रहेगा आम तौर पर परहेज

अश्विन माह के कृष्णपक्ष की सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या गुरुवार को है। इस दिन पितृपक्ष का विसर्जन हो जाएगा। हालांकि, प्रत्येक वर्ष प्राय: इसके दूसरे दिन से नवरात्रि प्रारंभ हो जाता है। परंतु, इस वर्ष पितृपक्ष की अमावस्या बाद नवरात्र प्रारंभ नहीं हो रहा। क्योंकि, इस वर्ष अश्विन माह का अधिकमास या मलमास 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा। धर्म के जानकारों के मुताबिक इस माह में पड़ने वाला अधिकमास 19 वर्ष बाद लग रहा है। इस बाबत काली मंदिर के मुख्य पुजारी जनमेयजय मिश्रा व पंडित गोवर्धन मिश्रा ने बताया कि इससे पूर्व अश्विन माह का अधिकमास वर्ष 2001 में आया था। उन्होंने बताया कि इस एक माह के उपरांत पड़ने वाले अश्विन मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि में 17 अक्टूबर को मां दुर्गा की आराधना में कलश की स्थापना की जाएगी।

जिसका विसर्जन नवमी तिथि में 25 अक्टूबर को किया जाएगा। दशहरा का त्योहार 26 अक्टूबर को है। पंडित महेश कुमार मधुकर के अनुसार पौराणिक मान्यताओं में बताया गया है कि मलिन मास होने के कारण कोई भी देवता इस माह में अपनी पूजा नहीं करवाना चाहते थे और कोई भी इस माह के देवता नहीं बनना चाहते थे। तब मलमास ने स्वयं श्री हरि से उन्हें स्वीकार करने का निवेदन किया। तब श्री हरि ने इस महीने को अपना पुरुषोत्तम नाम प्रदान किया। तब से इस महीने को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। पुजारी ने बताया कि इस महीने में भागवत कथा सुनने का विशेष महत्व माना गया है तथा दान-पुण्य करने से मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। इस मान्यता को ध्यान में रखकर कई लोग पुण्य स्थलों पर जाकर दान पुण्य करना नहीं भूलते। हालांकि इस साल कोरोना संक्रमण की वजह से मलमास में मेले बैगरह के आयोजन होने पर प्रतिबंध है।
हिन्दू पंचांग में अधिकमास का है महत्व
पुरोहितों के मुताबिक एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है जबकि, एक चन्द्र वर्ष 354 दिनों का। इस लिहाज से देखने पर इन दोनों वर्षों के बीच 11 दिनों का अंतर है, जो तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने को प्रत्येक तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है। जिसे अधिकमास कहते हैं और पंचांग निर्माण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस मास का काफी महत्व है। वरना, त्योहारों की व्यवस्था ही बिगड़ जाती।
अधिकमास में पड़ने वाली विशेष तिथियां } चतुर्थी : 20 सितम्बर व 5 अक्टूबर को

  • एकादशी : 27 सितम्बर व 13 अक्टूबर
  • पूर्णिमा : 01 अक्टूबर को अमावस्या : 16 अक्टूबर को
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