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सुस्ती:करपी और सोनभद्र वंशी सूर्यपुर में दर्जनों पुल बने लेकिन पहुंच पथ नहीं हाेने से आवागमन में बाधा

करपी21 दिन पहले
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  • पुनपुन नदी पर भी लिंक पथ नहीं रहने के कारण यातायात हो जाता है बाधित, यह करपी व कुर्था को जोड़ने वाला प्रमुख पुल है

करपी एवं सोनभद्र वंशी सूर्यपुर प्रखंडों में पुनपुन नदी पर आधे दर्जन से अधिक पुलों का निर्माण हो गया। लेकिन किसी भी पुल से अभी तक पूरी तरह संपर्क पथ का निर्माण नहीं हो सका है। अकेले सोनभद्र वंशी सूर्यपुर प्रखंड में धरनई, भगवतीपुर, अनुवां, वंशी थाना के पास, एकरोन्जा गांव में पुनपुन नदी पर पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। लेकिन किसी भी पूल के पास संपर्क पथ नहीं बन सका है। संपर्क पथ नहीं रहने के कारण पुल का लाभ से आम लोग वंचित हो रहे हैं।

शेरपुर गांव में पुनपुन नदी पर करोड़ों रुपए की लागत से कई वर्षों पूर्व ही पुल बनकर तैयार हो गया, लेकिन आज तक पहुंच पथ के लिये जमीन नहीं उपलब्ध होने के कारण पुल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मामूली वर्षा में वाहनों को क्या पैदल भी पुल पर चढ़ना मुश्किल हो जाता है और दुर्घटना होने का भय सताते रहता है। पुल के दोनों तरफ निजी जमीन है। जिसके कारण संपर्क पत्र नहीं बन पा रहा है। संपर्क पथ के निर्माण नहीं होने के कारण अब तक इस पुल से बड़े वाहनों का परिचालन नहीं हो पाया है।

पहुंच पथ बने तो चालकों व लोगों को हाेगी सहूलियत
संध्या के समय में भगवती पुर गांव की तरफ से लोग पुल पर आकर भ्रमण करते हैं और प्रकृति का नजारा लेते हैं। पुल के दूसरे के तरफ 50 फिट की गहरी खाई है। जिसके कारण साइकिल भी नहीं उतर पाता है। वंशी के पास भी पुनपुन नदी पर पुल का निर्माण किया गया है।लेकिन संपर्क नहीं रहने के कारण यह भी पूल लोगों को फायदा नहीं दे पा रहा है। पैदल किसी प्रकार पुल से आवागमन हो रहा है।

पुनपुन नदी पर बने सभी पुलों की कमोवेश यही स्थिति है। यदि इन सभी पुलों पर संपर्क पथ का निर्माण हो जाता तो आम लोगों को आवागमन की सुविधा हो जाती।साथ ही कई बेरोजगार युवक टेंपू, टैक्सी चलाकर अपनी आर्थिक स्थिति भी सुधार सकते थे और अपना स्वरोजगार कर सकते थे। इन पुलो पर संपर्क पथ बन जाने के बाद पूरे क्षेत्र की स्थिति में काफी बदलाव होगा और क्षेत्र का तेजी से विकास भी होगा।

कार्य को पूरा करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने भी की पहल, लेकिन नहीं निकला नतीजा
जमीन उपलब्ध कराने के लिए पदाधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक ने कई बार प्रयास किया। इसके लिए ग्रामीणों के साथ कई दौर की बैठक भी हुई, लेकिन मामला जमीन के बदले मुआवजे पर अटक जाता है। मिली जानकारी के अनुसार इस योजना में जमीन के बदले मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है।फिर भी पदाधिकारियों के द्वारा मुआवजे की राशि के लिए सरकार से पत्राचार भी किया गया।

इसके बावजूद पुल से लिंक पथ का निर्माण नहीं हो सका। इसी प्रकार धरनई स्थित पुनपुन नदी पर भी लिंक पथ नहीं रहने के कारण यातायात बाधित हो जाता है। धरनई पुल करपी एवं कुर्था प्रखंड को जोड़ने वाला प्रमुख पुल है। इस पुल का निर्माण के बाद लोगों को आस जगी थी कि करपी कुर्था के बीच दूरी काफी कम हो जाएगी। लेकिन इसके बनने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता दिख रहा है।

यहां भी निजी जमीन रहने का कारण संपर्क नहीं बन पाया है जैसे तैसे छोटी गाड़ियों का परिचालन हो रहा है। इसके अलावा भगवतीपुर गांव में पुल का निर्माण तो हो गया लेकिन दोनों तरफ मिट्टी का भराव नहीं किया गया और ना ही संपर्क पथ बना जिसके कारण पैदल भी इस पूर्व से उतरना मुश्किल है। पुर्व विधायक सत्यदेव सिंह कुशवाहा ने बताया कि लगातार जन सरोकार से जुड़े कार्यों के लिए संघर्ष किया। सड़क, पुल, बिजली किसी भी स्थान के विकास का पैमाना है।

जहां के लोगों को उक्त सुविधा प्राप्त हो जाता है। वहां के लोग स्वतः विकसित और सुखपूर्वक जीने लगते हैं। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पूल निर्माण निगम के प्रयास से पुनपुन नदी पर दर्जनों पुल का निर्माण कराया। इनके द्वारा पुल निर्माण कराए जाने के बाद क्षेत्र के लोग इन्हें पुलिया बाबा भी कहते है। उन्होंने फिर से एक बार ग्रामीणों से अपील की है कि जमीन देकर संपर्क पथ बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें।जिससे क्षेत्र का विकास तेजी से हो सके।

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