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दक्षिणी सूर्य मंदिर:यहां उत्तरायन व दक्षिणायन दोनों मुद्रा में है सूर्य की प्रतिमा

जहानाबाद13 दिन पहले
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  • महापर्व छठ के दौरान राज्य के कोने-कोने से यहां मन्नतें मांगने आते हैं हजारों श्रद्धालु

दक्षिणी सूर्य मंदिर जिले में सूर्य उपासना का एक बड़ा केन्द्र है। इस सूर्य मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। जनश्रूतियों के अनुसार प्राचीन काल में दक्षिणी में राजा यक्ष का किला था। किले का अवशेष आज भी दक्षिणी गढ़ के रूप में है। यहां सूर्य मंदिर तलाब में छठ व्रत करने का इतिहास भी सैकड़ों वर्ष पुराना है। पूर्व दक्षिणी का यह मंदिर इलाका सिंहटी के जमींदार के अधीन था। कालांतर में विशालगढ़ एवं इसके समीप बड़े तालाब का यह क्षेत्र बंजर हो चुका था। सिहटी गांव के ही शिबू पासवान की छोटी बेटी असाध्य कुष्ठ रोग से ग्रसित थी।

वह प्रतिदिन तालाब के किनारे बकरी चराने जाती थी। इस दौरान वह प्रतिदिन पत्तों की दोनी बनाकर तालाब के किनारे आंशिक रूप से दिखने वाले पत्थर पर बकरी का दूध डाल देती थी। ऐसा करते हुए दो वर्षों के बाद वह पूर्णत: स्वत: चंगा हो गई। तब से ही इस स्थान की महिमा को सार्वजिनक रूप से स्वीकार किया जाने लगा। जैसे ही इस बात की जानकारी लोगों को हुई तो जमींदार ने उस स्थान की खुदाई कराई। खुदाई में आंशिक रूप से दिख रहे पत्थर से भगवान सूर्य का मूर्ति निकली।

उसी स्थान पर भगवान विष्णु सहित अन्य देवी-देवताओं के भी मूर्ति मिले थे। उसके बाद इसी स्थान पर विशाल तालाब के पश्चिमी किनारे पर जमींदार द्वारा उस सूर्य मंदिर का निर्माण कराया गया था। तब से ही वहां छठ व्रत करने की परंपरा शुरू हुई जो आज भी बदस्तूर जारी है। यहां पूरे जिले और जिले के बाहर के श्रद्धालु भी मन्नत उतारने को आते हैं। दक्षिणी सूर्य मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान सूर्य की उत्तरायण एवं दक्षिणायन दोनों मुद्राओं की मूर्ति स्थापित है, जो शायद ही भारत के किसी अन्य स्थानों पर स्थित सूर्य मंदिरों में देखने को मिलता है। भगवान सूर्य की दोनों प्रतिमाओं का एक ही स्थान पर पाया जाना अतीत में इसके ख्याति प्राप्त स्थल होने का संकेत देता है।

जानकारों का कहना है कि आजादी के बाद से ही यहां वर्ष में दो बार होने वाले छठ पूजा में देश के कोने-कोने से लोगों की भारी भीड़ जुटती है लेकिन इस साल कोरोना की वजह से यहां सबकुछ सोशल डिस्टेंसिंग व प्रोटोकाल के तहत श्रद्धालुओं को आचरण करना होगा। छठ पर्व के दौरान यहां विशाल मेले का दृश्य दिखता है लेकिन इस साल किसी प्रकार के यहां मेले की अनुमति नहीं दी गई है। छठ पर्व के दौरान यहां दूर-दूर से आए पहलवानों के बीच कुश्ती प्रतियोगिता भी दशकों पहले से आयोजित होती आ रही है। साथ ही आगंतुकों के मनोरंजन के लिए छठ के दौरान तीन दिनों तक यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन स्थानीय लोगों के सहयोग से किया जाता है।

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