जहानाबाद में एक स्कूल ऐसा भी:एक कमरे में चलता है पूरा विद्यालय, जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं विद्यार्थी; रसोइया तो है, पर रसोई नहीं

जहानाबाद10 महीने पहले
प्राथमिक विद्यालय घुरन बीघा जमीन पर बैठकर पढ़ते छात्र।

जहानाबाद का प्राथमिक विद्यालय घुरन बीघा सामुदायिक भवन में चल रहा है। जिले का यह स्कूल मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। यहां एक ही कमरे में 5 कक्षाओं की पढ़ाई होती है। 90 विद्यार्थियों के लिए 4 शिक्षक यहा नियुक्त हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए बेंच-डेस्क की व्यवस्था नहीं। नतीजा छात्र-छात्राएं जमीन पर बोरे पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

यह स्कूल काको प्रखंड के घुरन बीघा गांव में है। इसकी स्थापना 2008 में हुई थी। स्थापना के 13 साल बाद भी विद्यालय का अपना भवन नहीं है। इस स्कूल में 1 से लेकर 5वीं क्लास तक पढ़ाई होती है। यहां वर्तमान में 90 विद्यार्थी नामांकित हैं। सरकार द्वारा 4 शिक्षकों की विद्यालय में नियुक्ति की गई है, फिर भी स्कूल में मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। शिक्षा विभाग द्वारा हर महीने इस विद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारियों को वेतन के रूप में लगभग दो लाख रुपए खर्च कर रही है।

रसोइया तो है लेकिन रसोई नहीं

स्कूल के कमरे में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। यहां मध्याह्न भोजन बनाने के लिए भी सरकार ने दो रसोईयों की नियुक्ति भी की है, लेकिन मध्याह्न भोजन बनाने की जगह नहीं है, नतीजा खाना खुले में बनता है। प्राथमिक विद्यालय घुरन बीघा की प्रधानाध्यापिका रेखा कुमारी ने बताया, 'मैं जब से इस विद्यालय में पदस्थापित हूं। तब से शिक्षा विभाग को भवन निर्माण कराने के लिए बार-बार प्रतिवेदन भेजा गया है, लेकिन भवन का निर्माण नहीं हो सका है। इस गांव में गैरमजरूआ जमीन भी है, लेकिन बार-बार प्रतिवेदन देने के बाद भी 13 वर्षों में भवन का निर्माण नहीं हो सका।'

खबरें और भी हैं...