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नवरात्र:शारदीय नवरात्र के पहले दिन की गई कलश स्थापना,भक्तों ने विधि विधान से की पूजा

अरवल12 दिन पहले
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  • आस्था के साथ की गई मां दुर्गा की पूजा, मां की भक्ति में लिन दिखे भक्त

शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ शनिवार को हो गया। पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की गई। इसके लिए सामग्री, घटस्थापना की सही विधि और व्रत की तिथियों के अनुसार लोगों ने पूजा पंडाल और अपने घरों में कलश स्थापना की। कोरोना वायरस को लेकर पूजा पंडाल में पहले की तरह आकर्षण नहीं देखा गया। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है।

कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है। घट स्थापना शक्ति की देवी का आह्वान है। मान्यता है कि गलत समय में घट स्थापना करने से देवी मां क्रोधित हो सकती हैं। रात के समय और अमावस्या के दिन घट स्थापित करने की मनाही है। ज्योतिषाचार्य विपिन पाठक के अनुसार, घट स्थापना का सबसे शुभ समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है।

अगर किसी कारण वश आप उस समय कलश स्थापित न कर पाएं।तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते हैं। प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। सामान्यत: यह 40 मिनट का होता है। हालांकि इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं था। इसलिए भक्तों ने शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापना किया।
आज मां चंद्रघंटा की भक्त करेंगे पूजा-अर्चना

कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी की भी व्यवस्था की। इस दौरान विधि विधान का भी ख्याल रखा गया। आज रविवार को द्वितीय चंद्रघंटा की लोग पूजा-अर्चना करेंगे।

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