त्योहार:21 वर्षों में 12वीं बार 15 को मनाई जाएगी मकर संक्रांति

जहानाबाद3 दिन पहले
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  • आज शनिवार दोपहर 12:49 तक रहेगा पुण्यकाल, स्नान व दान करने से होगा कल्याण

सनातन संस्कृति में मकर संक्रान्ति का विशेष महत्व होता है। लिहाजा इसे त्योहार के रूप में मनाया जाता है। ग्रहों के राशि परिवर्तन की इस खगोलीय घटना को संक्रांति कहा जाता है। यह संक्रान्ति सूर्य ग्रह का धनु से मकर राशि में प्रवेश करने पर लगता है। इस बार 14 जनवरी की रात 8.49 बजे भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। लेकिन सूर्य प्रधान पर्व होने के कारण मकर सक्रांति का त्योहार 15 जनवरी यानि आज मनाया जाएगा। हालांकि कई लोगों ने गुरुवार को ही पर्व मनाया। वैसे मान्यता के अनुसार मकर संक्रान्ति के दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इसी दिन सूर्य देव मकर राशि में गोचर करेंगे, जबकि शनि मकर राशि में पहले से विराजमान हैं। ऐसे में 14 जनवरी को मकर राशि में सूर्य और शनि ग्रह का एक साथ होना दुर्लभ संयोग है। यह संयोग 29 साल बाद जुट रहा है। इससे पूर्व यह 1993 ई. में यह योग बना था। जब शनि और सूर्य एक साथ मकर राशि में विराजमान थे। पौराणिक मान्यता के मुताबिक शनि ग्रह भगवान सूर्य के पुत्र हैं। लिहाजा पिता व पुत्र का एक राशि में मिलन काफी सुखद योग है। जो विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए विशेष फलदायी होता है।

पर्व को लेकर आचार्यों का मत: खिचड़ी पर्व को लेकर यहां के आचार्यों में कोई मतभेद नहीं है। धर्माचार्यों ने बताया कि धर्म सिंधु के अनुसार सूर्यास्त के बाद यदि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो संक्रान्ति का पुण्य काल अगले दिन ही मान्य होता है। संक्रान्ति का पुण्य काल 15 जनवरी को प्रात:काल से दोपहर 12.49 बजे तक रहेगा। धर्माचार्यों ने बताया कि कई पंचागों के अनुसार पिछले 21 सालों में 11 वर्ष 15 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाने अच्छा रहा है। 2001, 2002, 2005, 2006, 2009, 2010, 2013 और 2014 में 14 जनवरी को पुण्यकाल होने के कारण चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ रहा। जबकि 2003, 2004,2007, 2008, 2011, 2012,2014, 2015, 2018 , 2019 और 2020 में 15 जनवरी को मकर संक्रांति त्योहार रहा। 2021 में 14 जनवरी को मना। इस साल 2022 में 14 और 15 जनवरी दो दिन हो गया। लेकिन, पंचांग नहीं मनाने वालों ने हर साल 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाते हुए चूड़ा-दही व तिलकुट खाते हैं।

चूड़ा, तिल, मिठाई, खिचड़ी सामग्री व गर्म कपड़े दान करने से सुख-समृद्धि
हुलासगंज आध्यात्मिक संस्थान के प्रमुख स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज ने बताया कि मकर राशि के सूर्य के साथ ही पुण्यकाल में स्नान व दान के बाद चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ होगा। पुण्यकाल में स्नान के बाद तिल का होम करने और चूड़ा, तिल, मिठाई, खिचड़ी सामग्री, गर्म कपड़े दान करने व इसे ग्रहण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। धर्माचार्यों ने कहा कि मकर राशि के सूर्य होते ही सूर्यदेव उतरायण हो जाते हैं और देवताओं के दिन और दैत्यों के लिए रात शुरू होती है। खरमास खत्म होने के साथ ही माघ माह शुरू हो जाता है।

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