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दवाइयों की कमी:आक्सीमीटर, रेगुलेटर सहित कई सामान आउट ऑफ मार्केट

जहानाबाद11 दिन पहले
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कोरोना के इलाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण दवाइयों की इस समय जिले में किल्लत हो गई है। थोक से लेकर खुदरा दवा विक्रेताओं को मुश्किल से दवाएं मिल रही हैं। कई दवाओं की कीमत तो थोक में ही खुदरा विक्रेताओं से बढ़ाकर ली जा रही है। कई प्रचलित दवाओं की किल्लत होने पर वैकल्पिक दवा देकर भरपाई की जा रही हैं। पल्स ऑक्सीमीटर की कीमत कई गुणा अधिक दाम पर मरीजों की मजबूरी के हिसाब से तय की जा रही है। ऑक्सीजन फ्लो मीटर मार्केट से आउट है। भांप लेने वाली मशीन और सर्जिकल गलव्स की कीमतों में खासा इजाफा हुआ है।

स्थिति यह है कि एज़ीथरल-500 एमजी की टैबलेट सभी दवा दुकानों पर उपलब्ध नहीं है। जहां पुराना स्टॉक है, वहां मिल जा रही है, नहीं तो दूसरी कंपनी की दवा दी जा रही है। इसके अलावा कारवोल प्लस, मेडरल 16 एमजी की टैबलेट, आइवरमैक्टीन-12 एमजी, डाक्क्सीसाइक्लिन सौ एमजी की टैबलेट्स, विटामिन सी की प्रचलित ब्रांड लेमसी 500 एमजी की टैबलेट से लेकर पारासिटामोटल की सबसे अधिक बिकने वाला ब्रांड कालपोल भी बाजार में न के बराबर उपलब्ध है। बुखार मापने का यंत्र थर्मामीटर, आक्क्सीजन सिलिंडर का रेगुलेटर भी मार्केट में नहीं है।

रेमेडिसिविर तो यहां के बाजार में एक भी इंजेक्शन नहीं है। वैसे इस इंजेक्शन का यहां इस्तेमाल भी कोई डाक्टर न के बराबर कर रहा है। एक दवा दुकानदार ने बताया कि कोरोना से जुड़ी दवाओं की बाजार में काफी कमी है। किसी तरह काम चलाया जा रहा है। मल्टी विटामिन की प्रचलित ब्रांड की दवाओं की भी काफी कमी है। कई दवाओं के थोक मूल्य में ही भारी वृद्धि के कारण स्थानीय दुकानदार खरीदारी से परहेज कर रहे हैं। हालांकि जो अधिक मूल्य पर खरीदारी कर रहे हैं वे महंगी बेच रहे हैं।

आम तौर पर एंटीबायोटिक व अन्य सामान्य जरूरत की दवाओं की कोई कमी नहीं, जरूरी दवाओं की कालाबाजारी से बच रहे अधिकांश दुकानदार

तिगुने रेट पर मिल रही भाप लेने वाली मशीन
कोरोना काल में भाप मशीन की मांग बढ़ गई है। डॉक्टर इस समय सभी को भाप लेने की सलाह दे रहे हैं। मांग के बाद स्टीम मशीन लगभग आउट ऑफ मार्केट हो गया है। पहले एक मशीन की कीमत दो से ढाई सौ रुपये थी। अब यह तिगुने रेट पर मिल रही है। यही स्थिति पल्स ऑक्सीमीटर की है। सामान्य दिनों में यह छह से आठ सौ रुपये में मिल जाता था। अभी ढाई सौ प्रिंट वाला प्लस ऑक्सीमीटर 22 सौ रुपये में मिल रहा है, लाल मंदिर के पास एक सर्जिकल दुकान पर तो इसके लिए पैरवी भी करनी या करवानी पड़ती है। वहीं 5 सौ रुपये में एक डिब्बा मिलने वाला सर्जिकल गलव्स साढ़े छह से 7 सौ रुपये में मिल रहा है।

सरकारी अस्पताल में भी दवाओं की कमी
हालांकि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता को ले फिलहाल जिला प्रशासन के स्तर से नियमित रूप से मॉनिटरिंग हो रही है लेकिन फिर भी कुछ दवाओं की परेशानी चल रही है। मांग के अनुसार दवा की समय पर आपूर्ति नहीं की जा रही है। अज़ीथ्रोमायसिन की टेबलेट की मांग की गई थी। मांग के अनुपात में आपूर्ति नहीं होने पर प्रखंडों में परेशानी हो रही है। दरअसल इस समय एजिथ्रोमाइसिन की खपत काफी बढ़ गई है। विभाग कुछ ज्यादा खपत वाली दवाओं की आपूर्ति करने में असहज दिख रहा है। वैसे डीएम ने कई जरूरी दवाओं को स्थानीय स्तर पर खरीद के निर्देश जारी किए हैं।

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