धर्म-समाज:पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री के पवित्र शक्ति मंत्रों से गुंजायमान हाेता रहा पूरा वातावरण

जहानाबाद19 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • शहर से गांव तक देवी मंदिरों व घरों से आदि शक्ति मां की अराधना से निकली भक्तिमय पवित्रता की सुगंधि

शारदीय नवरात्र के पहले दिन गुरुवार को शहर से लेकर गांव तक कलश स्थापना व दुर्गाशप्तशती पाठ के आयोजन से निकल रहे मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की शक्ति मंत्रों की गूंज से पूरा माहौल पवित्रता की सुगंधि से दमक उठा। नवरात्र के शुरूआत से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। गुरुवार को सुबह से ही लगभग सभी देवी मंदिरों से लेकर आम लोगों के घरों में दुर्गा सप्तशती के पाठ से पूरा माहौल गुंजायमान हो उठा। शहर के दरधा-जमुने संगम घाट के पास स्थित मां मांडेशवरी के दरबार को पूरी तरह से सजाया गया है। इसके अलावा तमाम दुर्गा मंदिरों की साफ-सफाई और रंग रोगन किया गया है जबकि कई परिसरों में पंडाल डेकोरेशन, लाइटिंग आदि के सजाने का काम किया गया है।

शुभ मुहूर्तों में कलश स्थापना को लेकर सक्रिय रहे श्रद्धालु
घट स्थापना के दिन चित्रा नक्षत्र, गुरुवार दिन, विष कुम्भ जैसे शुभ योग था। धर्मचार्यो ने बताया कि गुरुवार का दिन कन्या राशि में चर्तुग्रही योग का निर्माण भी हो रहा था। घट स्थापना मुहूर्त सात अक्टूबर को सुबह छह बजकर 17 मिनट से सात बजकर सात मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक रहा।

दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष फलदायी
सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व होता है। इन नौ दिनों में देवी मां की पूजा से कई तरह के विशिष्ट कार्य पूरे होने की बात भी कही जाती है। जानकारों के अनुसार सनातन धर्म में देवी शक्ति का प्रतीक मानी गई हैं। किसी भी कार्य को करने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती ही है, ऐसे में देवी मां का आह्वान किया जाता है। मान्यता के अनुसार नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। दुर्गा सप्तशती पाठ में 13 अध्याय है। पाठ करने वाला, पाठ सुनने वाला सभी देवी कृपा के पात्र बनते हैं। नवरात्रि में नव दुर्गा की पूजा के लिए यह सर्वोपरि किताब है। इसमें मां दुर्गा के द्वारा लिए गये अवतारों की भी जानकारी प्राप्त होती है। इसमें लिखे मंत्र न केवल आपकी विभिन्न रोगों से रक्षा करते हैं, बल्कि दुर्गा सप्तशती का यह पाठ आपके लिए विशेष फलदायी भी सिद्ध होता है।

खबरें और भी हैं...