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बदहाली की इंतेहा:एसएस कॉलेज में बिना शिक्षक कई विषयों में इंटरमीडिएट से एमए तक की हो रही पढ़ाई

जहानाबाद5 दिन पहले
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  • विभागों में शिक्षकों की शून्यता से चार हजार से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य हो रहा चौपट

जिले के सबसे बड़े शैक्षणिक संस्थान एसएस कालेज में शिक्षकों की भारी कमी से वहां पढ़ाई के लिए नामांकित चार हजार से भी अधिक बच्चों का भविष्य चौपट किया जा रहा है। आश्चर्यजनक तरीके से वहां, इकोनॉमिक्स, बॉटनी, पॉलिटिकल साइंस व केमेस्ट्री जैसे प्रमुख कुछ ऐसे विभाग हैं, जहां इंटर से एमए तक की पढ़ाई की कागज पर व्यवस्था है लेकिन उस फेकल्टी में एक भी शिक्षक तैनात नहीं हैं। यहां तक कि फिलहाल कॉलेज में जितने विभाग हैं उसकी तुलना में उस संख्या में वहां शिक्षक भी कार्यरत नहीं हैं।

कॉलेज में कई विभागों की पढ़ाई शिक्षकों की कमी की वजह से बंद हो चुकी है लेकिन फिलहाल यहां सोलह उपलब्ध विभागों में शिक्षकों की संख्या मात्र पंद्रह ही है। इसी प्रकार फिलोस्फी में भी स्वीकृत तीन पदों के विरूद्ध मात्र एक शिक्षक पदस्थापित हैं। यहां फिलहाल चार विभागों में यहां इंटर से पीजी तक की पढ़ाई की कागजी व्यवस्था है लेकिन शिक्षकों की घोर कमी से जमीन पर हालात अत्यंत दयनीय है। आश्चर्यजनक तरीक से इस तरह के अत्यंत खराब शैक्षणिक हालात किसी राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के एजेंडे में भी नहीं हैं।

वोकेशनल कोर्स को लेकर कॉलेज प्रशासन दिखा रहा गंभीरता
सामान्य विषयों की खस्ताहाल शैक्षणिक व्यवस्था के बीच कॉलेज प्रशासन रोजगारपरक वोकेशनल कोर्सों को लेकर गंभीरता दिखा रहा है। कॉलेज में फिलहाल बीसीए, बीबीए, बायोटेक, बी लिस, एमएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कॉलेज के आंतरिक संसाधनों से विश्वविद्यालय से अनुमति लेकर चलाया जा रहा है। इन कोर्सों के फी का निर्धारण यूनिवर्सिटी के द्वारा तय होता है।

रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा से जिले के सैकड़ों छात्रों को मिलता लाभ
इन रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा की वजह से जिले के सैकड़ों बच्चों को मंहगी पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है। यह जिले के सबसे बड़े कॉलेज के मामले में एक अच्छी पहल है। जानकारों का मानना है कि वोकेशनल काेर्सो की संख्या भी यहां और बढ़ाने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इसका फायदा मिल सके।

1952 में स्थापित हुआ था कॉलेज
गौरतलब हो कि 1952 में स्थापित यह कालेज जिले का ही नहीं बल्कि संपूर्ण मगध विश्वविद्यालय स्तर पर आधारभूत संरचनाओं के हिसाब से काफी प्रसिद्ध व समृद्ध माना जाता रहा है। एक जमाने में एसएस काॅलेज की पढ़ाई श्रेष्ठ स्तर की मानी जाती थी। यहां से पढ़कर जिले व आसपास के जिले के हजारों स्टूडेंट देश की प्रतिष्ठित सरकारी सेवाओं में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं।

विश्वविद्याल को है पूरी जानकारी
काॅलेज प्रशासन द्वारा शिक्षकों की घोर कमी दूर करने के लिए विश्वविद्यालय को लगातार अंतरालों पर प्रतिवेदन भी दिया जाता रहा है लेकिन इसका वहां से कोई निदान नहीं निकल रहा है। कॉलेज प्रशासन हालांकि अपने स्तर से वोकेशनल कोर्स के संचालन की ठीक-ठाक व्यवस्था कर रहा है लेकिन सब कुछ कॉलेज प्रशासन के हाथ में है भी नहीं।

कालेज प्रशासन द्वारा शिक्षकों की कमी को लेकर विश्वविद्यालय को प्रतिवेदित किया गया है। कई विभागों में कालेज के आंतरिक संसाधन से शिक्षकों की कंट्रेक्ट पर नियुक्ति कर बच्चों की पढ़ाई को सुचारू करने का प्रयास जारी है। उम्मीद है शीघ्र ही इस दिशा में विश्वविद्यालय से निदान निकाल लिया जाएगा।
प्रो.सुधीर कुमार मिश्रा,प्राचार्य, एसएस कालेज, जहानाबाद

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