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सुस्ती:आईसीडीएस के डीपीओ के खाते से 38 लाख के घोटाले का आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर

जहानाबाद15 दिन पहले
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नगर थाना जहानाबाद - Dainik Bhaskar
नगर थाना जहानाबाद
  • तत्कालीन डीपीओ व बैंक अधिकारी की भूमिका दिख रही संदिग्ध, जांच में मिल रहे संकेत

आईसीडीएस के डीपीओ के खाते से फर्जीवाड़ा कर अड़तीस लाख रुपए की अवैध निकासी का मुख्य आरोपी केस दर्ज होने के पांच महीने बाद भी फरार चल रहा है। विभागीय स्तर पर भी उसके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। दरअसल तत्कालीन डीपीओ रश्मि सिंह ने जांच में उक्त फर्जीवाड़ा को पकड़ा था। उन्होंने तब तुरंत इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को देते हुए गत 19 फरवरी को नगर थाना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी।

लेकिन सरकारी राशि के घोटाले जैसे संगीन अपराध में अब तक मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है। राशि गबन मामले में नामजद अभियुक्त बने सांख्यिकी सहायक सह नाजिर राजीव करण अब भी बेफिक्र होकर घूम रहा है लेकिन पुलिस की नजर अब तक उस पर नहीं पड़ रही है। जानकारों का मानना है कि आरोपित को पकड़ में नहीं आने से साक्ष्यों को नष्ट होने की आशंका है। पूरे मामले में तत्कालीन एक अन्य डीपीओ तथा वर्तमान में काको की सीडीपीओ सीमा कुमारी एवं बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक संजय कुमार भी मामले में चुप्पी साध रखे हैं। उनकी चुप्पी पर भी सवाल भी उठ रहे हैं।

चार्जभार लेने के बाद कैश बुक के मिलान में डीपीओ ने पकड़ी गई गड़बड़ी
18 नवंबर 2020 को डीपीओ का चार्ज भार लेने के बाद डीपीओ रश्मि सिंह ने कैश बुक का अवलोकन शुरू किया तो उन्हें गड़बड़झाले की शंका हुई। जिसके बाद उन्होंने वरीय अधिकारी को मामले से सूचित कर नगर थाना में 19 फरवरी को प्राथमिकी दर्ज कराई। इधर मामला प्रकाश में आने पर तत्कालीन डीएम नवीन कुमार ने डीडीसी मुकुल कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में वरीय अधिकारियों की तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई।

हस्ताक्षर युक्त चेक का हुआ है इस्तेमाल
कई बार राशि निकासी में अकाउंट ट्रांसफर के साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेने के लिए संस्थानों के नाम पर चेक भी जारी कर फर्जीवाड़ा किया गया है। जिसमें तत्कालीन प्रभारी डीपीओ के हस्ताक्षर युक्त चेक का इस्तेमाल हुआ है। बाद में प्रभारी डीपीओ के हस्ताक्षर युक्त कई चेक जब्त भी किया गया है। हालांकि प्रभारी डीपीओ सीमा कुमारी द्वारा चेक पर किया गया हस्ताक्षर को जाली बताया है। कई बार नेट बैंकिंग सहारा लेकर उक्त नाजिर ने आईसीआईसीआई बैंक के अपने निजी खाता में मोटी रकम ट्रांसफर भी की है।​​​​​​​

8 महीने में 38 लाख रुपए की राशि निकासी का मामला सामने आया
8 माह में 38 लाख की राशि निकासी का मामला सामने आया है। सरकारी खाता से मोटी रकम का फर्जीवाड़ा कर निकासी होने के बाद आईसीडीएस के डीपी और रश्मि सिंह ने नाजीर राजीव करन के साथ-साथ तत्कालीन डीपीओ सीमा कुमारी एवं बैंक प्रबंधक के भूमिका पर भी सवाल उठा वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी है। एक आरोपी पर केस दर्ज होने के बाद अन्य संदिग्धों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल उठ रहे हैं। दरअसल मामले से जुटे घटनाक्रम खुद कई संकेत दे रहे हैं। दरअसल डीपीओ के खाता से तकरीबन आठ माह से राशि निकासी होती रही।​​​​​​​

ऊंची पहुंच की वजह से ही कार्रवाई की गति धीमी
फर्जीवाड़ा में शामिल लोगों की पहुंच काफी ऊंची बताई जा रही है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि ऊंची पहुंच की वजह से ही जांच व कार्रवाई की गति धीमी है। हालांकि एसपी दीपक रंजन के द्वारा थानों के कांडों को खंगालने के बाद मामले में आरोपित व अन्य संदिग्धों में हड़कंप मचा है। डीएम द्वारा बनाई गई जांच कमेटी के अध्यक्ष डीडीसी मुकुल गुप्ता ने भी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपने की बात कह अपना पल्ला झाड़ लिया है। जिला प्रशासन से जुड़े अन्य अधिकारी मामला पुलिस के हाथ में होने की बात कर गेंद पुलिस के पाले में डाल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर निष्पक्ष जांच हुई, जैसी की संभावना भी है, तो आगे कई और बड़ी मछली भी जाल में फंस सकेगी।​​​​​​​

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