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लापरवाही:सदर अस्पताल के जर्जर घोषित किए जा चुके भवन में चल रहा मरीजों का इलाज

जहानाबाद13 दिन पहले
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  • दो माह पहले शिलान्यास होने के बाद भी नहीं शुरू हो रहा रहा नए भवन के निर्माण का कार्य

जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में खतरों के बीच मरीजों का इलाज किया जा रहा है। दरअसल लगभग पांच वर्ष पूर्व ही भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने सदर अस्पताल के भवन के अधिकांश हिस्सों को जर्जर व खतरनाक घोषित किया है। बावजूद इसके विभाग वैकल्पिक व्यवस्था कराने में लापरवाही बरत रहा है। नतीजतन यहां आकर इलाज कराने वाले सैकड़ों लोगों की जिंदगी प्रतिदिन खतरों से पार पाती है। कई दफे कम अंतरालों पर अस्पताल के अंदर के हिस्सों का छज्जा भी गिरता रहता है।

सबसे पहले कुछ वर्ष पूर्व किचेन वाले पूर्वी भवन में अस्पताल की छत का एक बड़ा सा हिस्सा धड़ाम हुआ था तब कई कर्मी घटना में चोटिल हुए थे। उसके बाद पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाले कॉरिडोर के छत का एक बडा हिस्सा गिरा था। तब कई लोग बाल-बाल बचे थे। लगभग एक सप्ताह पूर्व भी अस्पताल के जांच लेबोरेट्री की छत का हिस्सा काम कर रहे कर्मी के टेबुल पर आकर गिरा था।

मरीजों के जान को खतरे में डाल रहे है अधिकारी, हो सकता है हादसा
अब भी अस्पताल के कई हिस्से इतने जर्जर हैं कि वे कभी भी धड़ाम हो सकते हैं लेकिन बावजूद इसके यहां के अधिकारी अपने को लाचार बता मरीजों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। नए भवन के निर्माण में लगातार देरी होने से खतरा और बढ़ता जा रहा है। अगर समय रहते इस समस्या का निदान नहीं कराया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। विभाग के रवैये से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शायद विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।

डेढ़ सौ करोड़ की लागत से दो चरणों में होना है तीन सौ बेड के अस्पताल भवन का निर्माण, शिलान्यास के बाद भी हो रही देरी
2007 में ही तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने सदर अस्पताल के निरीक्षण में इस अस्पताल को तीन सौ बेड के अस्पताल में अपग्रेड करने की घोषणा की थी। तब के बाद वर्षों तक मामला फाइलों में धूल फांकता रहा। लेकिन वर्तमान जिलाधिकारी नवीन कुमार ने रूचि लेकर विभागीय अधिकारियों से मिलकर निर्माण की अड़चने दूर करा दी। प्रथम फेज का टेंडर प्रक्रिया भी फाइनल हो गई। यहां तक कि दो माह पूर्व नए भवन का शिलान्यास भी हो गया। अब विभागीय अनदेखी व लापरवाही से निर्माण कार्य क्यों लटका है, कोई सही सही जवाब नहीं दे रहा है। इतने महत्वपूर्ण व संवेदनशील मामलों में विभाग की लापरवाही बेहद चौकाने वाली है। यहां इलाज कराने आने वाले मरीज मजबूरी में जर्जर भवन में ही आने को बाध्य हैं। अस्पताल के बाहरी हिस्से का छज्जा तो अक्सर गिरता रहता है लेकिन उसकी रिपेयरिंग के लिए विभागीय अधिकारी राशि का रोना राे रहे हैं।

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