जहां नारी का सम्मान वहां देवी का वास:बड़ौरा गांव स्थित सिद्धनाथ बाबा धाम में आयोजित प्रवचन के दौरान बोलीं पंडित अखिलेश्वरी जी

रामगढ़9 महीने पहले
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प्रवचन करती पंडित अखिलेश्वरी। - Dainik Bhaskar
प्रवचन करती पंडित अखिलेश्वरी।

जहां नारी का सम्मान होता है,वहीं देवी-देवताओं का वास होता है।जिस समाज मे नारी का अपमान व तिरस्कार किया जाता है उस समाज को बर्बाद होने से कोई नही बचा सकता। उक्त बातें यूपी बिहार की सीमा पर बसे बड़ौरा गांव स्थित सिद्धनाथ बाबा धाम में आयोजित प्रवचन के दौरान प्रवचन कर्ता पंडित अखिलेश्वरी जी ने कही।उन्होंने चौपाई “एक ही धर्म एक ब्रत नैमा,कार्य वचन मन पति पद प्रेमा”का जिक्र करते हुए नारी की शक्ति से लोगों को अवगत कराया।

पंडित अखिलेश्वरी ने कथा का रसपान कराते हुए कहा की नारी का धर्म है पति के चरणों में प्रेम करना नारी का जप, तप, साधना, योग, व्रत, भजन पति व्रत धर्म है। नारी अपने चरित्र के बल पर सदैव अपनी रक्षा करती आयी है।उन्होंने कहा कि नारी के चरित्र का हनन करने वालो को परमात्मा कभी माफ नही करते उसके चरित्र को डिगाने की कोशिश करने वाले देवता भी उसका बाल बाका नही कर सकते उन्हें भी बालक बन गोदी में खेलना पड़ता है।नारी का धर्म बड़ो का सेवा व सत्कार करना होता है।उन्होंने प्रवचन का श्रवण कराते हुए श्रोताओं से नारी का सम्मान करने की बात कही।

कहा- अगर एक बेटी शिक्षित होगी तो दो कुल की मान-मर्यादा बढ़ेगी
उन्होंने कहा कि नारी ही समाज को अच्छी दिशा देती है।एक प्रसंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर एक बेटी शिक्षित होगी तो दो कुल की मान-मर्यादा बढ़ेगी।नारी शक्ति से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण होगा नारी को जब माँ के रूप में देखेंगे तो ममता की छांव से आप की रक्षा करेगी।अगर नारी को बहन के रूप में देखेंगे तो कलाई में कच्चा सूत बांध आप के जीवन की रक्षा के लिए संकप्ल लेगी।

वहीं नारी समाज में दानव प्रवृत्ति जैसे लोगों का संहार करने के लिए दुर्गा काली का रूप धारण करती है।उन्होंने भारतीय संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि आज हमारा समाज अपने संस्कृति को भूल पश्चिमी सभ्यता की ओर अग्रसर हो रहा है। जो लोगों के विनाश का कारण बन रहा है।इस दौरान प्रवचन कर्ता रामप्रवेश सिंह, रामजी, रामायणी जालौन तथा राधेश्याम तिवारी ने श्रोताओं को श्रीराम कथा का रसपान कराया। संचालन सुखेन तिवारी ने किया।

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