आस्था का पर्व:डेहरी सदर में भाईदूज पर बहनों ने की भाइयों के लंबी उम्र की कामना

काराकाट24 दिन पहले
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भाई बहन के बीच स्नेह और आस्था का पर्व भाई-दूज के रूप में मनाया गया। भाईयों की लम्बी उम्र के लिए मनाये जाने वाला पर्व भैया दूज को लेकर डेहरी में भी उत्साह देखने को मिला। यहां महिलाएं पूरी आस्था व श्रद्धा के साथ पर्व मनाईं और भाइयों के लिए लम्बी उम्र की कामना की। पर्व मनाने के दौरान बहनों ने सुबह से ही उपवास कर रखा था। महिलाएं एक जगह इकट्ठा होकर डंडे से गोबर और कांटे के जरिए बनाए गोधन कुटा तथा गीत गाया। महिलाओं ने बताया कि गाय के गोबर से बने गोधन के अलावा यम और यमी तथा बिच्छू की आकृति बनाया जाता है

जिसे पूजा के अंत में सभी महिलाएं व लड़कियां एक साथ मिलकर इसकी कुटाई करती हैं। परंपरा के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भैया दूज मनाया जाता है। भैया दूज के इस पर्व को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं। पौराणिक मान्यता है कि बहनें पहले भाइयों को श्राप देती हैं फिर, उसे जीवित करती हैं। वहीं भाई अपने बहनों को उपहार देते हैं। रक्षाबंधन के बाद इस त्योहार का बेसब्री से बहनें इंतजार करती हैं। इस मौके पर शहर के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं ने पुरोहितों से भाई-दूज मनाने की परंपरागत कथा भी श्रवण किया। सिटी रिपोर्टर काराकाट के अनुसार आवरा कुटी ले भावंरा कुटी ले यम के दुआर... आदि पारंपरिक गीतों के साथ प्रखण्ड के विभिन्न गांवों से जुड़ी महिलाओं ने भैया दूज (गोधन) कूटते हुए अपने पति, पुत्र समेत अन्य पुरुष स्वजनों की सलामती व दीर्घायु जीवन की कामना किया। परम्परा के अनुसार जिह्वा पर रेगनी का कांटा रख पहले उन्हें मृत्य का श्राप दिया। फिर जीवित व सकुशल होने की कामना की। काराकाट के पुनिता देवी, संध्या देवी, मोथा के मीना देवी, गोडारी के इला त्रिपाठी सहित कई महिलाओं ने बताया कि इस दिन इस प्रक्रिया को करने से पति- पुत्र को दीर्घायु होने की धार्मिक मान्यता भी है।

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