गौरव के प्रतीक / गढ़ की खुदाई से पौराणिक धरोहर की कई चीजें संरक्षण के अभाव में हुईं गायब

Many things of the mythological heritage disappeared due to lack of protection due to the excavation of the citadel
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Many things of the mythological heritage disappeared due to lack of protection due to the excavation of the citadel

  • जिला मुख्यालय से 35 किमी की दूरी पर स्थित महरथ गांव अपने गर्भ में ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक को सहेजे हुए है

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 05:00 AM IST

काशीचक. जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूरी पर स्थित महरथ गांव अपने गर्भ में ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक को सहेजे हुए है। गांव स्थित गढ़ तथा पोखर की खुदाई से हिन्दू देवी देवताओं की दर्जनों प्राचीन मूर्तियां प्राप्त हुई है । इसके अलावे हल चलाते वक्त चांदी के सिक्कों से भरा हांडी व नींव खोदने के दौरान कई मिट्टी के बर्तन, हजारों वर्ष पुराने ईंट तथा दीवार के अवशेष भी मिले हैं । मगर संरक्षण के आभाव में खुदाई से प्राप्त दर्जनों मूर्तियां चोरी चली गई ।

ग्रामीणों का मानना है कि पुरातत्व विभाग द्वारा गांव स्थित गढ़ की खुदाई कराए जाने पर ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व की दर्जनों चीजें प्राप्त हो सकती हैं ।गांव का ऐतिहासिक महत्व के बारे में ग्रामीण लोग बताते हैं कि उत्तर गुप्तकाल के शाशक आदित्यसेन का सेनापति महारथ गांव स्थित गढ़ पर निवास करता था। उसी के नाम पर इस गांव का नाम महरथ रखा गया। तब शाशक का किला गांव से पश्चिम  पार्वती गांव स्थित वैदियक पर्वत पर हुआ करता था। लोगों का मानना है कि पहाड़ से गढ़ होते पोखर तक एक सुरंग थी। जिसकी मोटी दीवारों के अवशेष आज भी मिलते हैं। जबकि 12 एकड़ में अवस्थित पोखर भी गांव के पौराणिक महत्व को बयां करता है।

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