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रघुवंश बाबू का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन:राजकीय सम्मान के साथ महनार के गंगाघाट पर हुआ पूर्व केंद्रीय मंत्री का अंतिम संस्कार

महनार15 दिन पहले
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  • अपने नेता का अंतिम दर्शन करने को लेकर व्याकुल दिखे लोग, भीड़ रोकने में करनी पड़ी मशक्कत

पूर्व केंद्रीय मंत्री, समाजवादी जनप्रिय दिवंगत नेता डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। पूरे राजकीय सम्मान के साथ महनार के हसनपुर स्थित पतित-पावनी गंगाघाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके छोटे पुत्र इंजीनियर शशि शेखर ने दी। गंगा घाट पर श्रद्धांजलि देने के लिए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के अलावा बिहार सरकार के दो मंत्री एवं कई विधायक एवं जनप्रतिनिधि आदि उपस्थित रहे। अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ महनार प्रखंड के हसनपुर तिमुहानी गंगा घाट पर संपन्न हो गया। उनके छोटे पुत्र शशि शेखर ने पार्थिव शरीर को पूरे विधि विधान के साथ मुखाग्नि दी।

इसके पूर्व गंगा घाट पर पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, बिहार सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार, महनार के विधायक उमेश सिंह कुशवाहा, राजापाकर के विधायक शिवचंद्र राम, विधान पार्षद सलीम परवेज, आलोक मेहता, मंगनी लाल मंडल, सांसद प्रतिनिधि प्रमोद सिंह, छोटू सिंह, शैलेंद्र प्रताप सिंह, राणा रणधीर सिंह चौहान, राजेश सिंह, पातेपुर विधायक प्रेमा चौधरी, पूर्व विधायक डॉ. अच्युतानंद सिंह,भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मनोज कुमार मेहता, प्रियरंजन दास, इंद्रजीत राय सहित दर्जनों की संख्या में नेताओं ने रघुवंश प्रसाद सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि एवं फूल माला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वैशाली की डीएम उदिता सिंह ने भी पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बिहार पुलिस के 21 जवानों ने उन्हें सलामी दी।

सैकड़ों की संख्या में लोगाें ने अपने प्रिय जननेता को अंतिम विदाई दी
पार्थिव शरीर गंगा घाट पर पहुंचने के साथ ही वहां सैकड़ों की संख्या में लोगाें ने अपने प्रिय जननेता को अंतिम विदाई देने एवं अंतिम दर्शनों को पहले से ही उपस्थित थे। सभी अपने प्रिय नेता का अंतिम दर्शन करने को व्याकुल थे। बार-बार प्रशासनिक स्तर पर भीड़ को संयत रहने का आग्रह किया जा रहा था बावजूद लोग किसी भी प्रकार अपने नेता को एक नजर देखना चाह रहे थे। गंगा घाट पर प्रशासन की ओर से अंतिम क्रिया की सारी व्यवस्था की गई थी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एवं दोनों मंत्री नीरज कुमार व जय कुमार सिंह परिजनों के साथ उपस्थित रहे।

रघुवंश बाबू के पांच शब्द हर किसी के हृदय को साल गया : नीरज
सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने श्रद्धांजलि देने के बाद कहा उनके लिखे पांच शब्द, लेकिन अब और नहीं क्षमा करें। हर किसी के हृदय को आने वाले वर्षों तक सालता रहेगा। उनकी करुणाशीलता, दया, ममता, लोकतंत्र की जननी भूमि के प्रति प्रतिबद्धता, कृषक समूह के प्रति उनकी चिंता, नई पीढ़ी के बाहुबल और धनबल से मुकाबला करने की जिम्मेवारी सौंप कर चले गए। उन्होंने कहा वह उम्मीद करते हैं कि उनको जानने वाले लोग उनके संकल्प की रक्षा करेंगे। यह भी कहा कि जीवन के अंतिम समय में भी कृषक के लिये चिंता थी। वे राजनीति की भीड़ में अलग, बेबाक व निश्चल थे। कहा कि धनबल एवं बाहुबल की राजनीति पर प्रहार रघुवंश बाबू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

रघुवंश बाबू के सपनों को मुख्यमंत्री करेंगे साकार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार डॉक्टर रघुवंश प्रसाद सिंह के सपनों को पूरा करने का काम निश्चित रूप से करेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री ने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। यह बातें बिहार सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह ने रघुवंश प्रसाद सिंह को श्रद्धांजलि देने के बाद कहीं। उन्होंने कहा कि आज जो भी व्यक्ति परिपक्व, इमानदार और बेबाक राजनीति करना चाहता है वह उनसे सीख ले सकता है। उन्होंने रघुवंश बाबू को याद करते हुए कहा कि समाजवाद का नामचीन चेहरा रहे रघुवंश प्रसाद सिंह के जाने से बिहार ही नहीं बल्कि देश ने अपना एक बड़ा और सच्चा सपूत खो दिया है।

उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया है और उन्हें एवं मंत्री नीरज कुमार को अधिकृत कर के मुख्यमंत्री ने भेजा है। अंतिम समय में उनके द्वारा लिखे गए पत्र पर उन्होंने कहा कि यह कोई छोटी बात नहीं है। जो व्यक्ति जीवन मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा हो अंतिम समय में भी वह लोकतंत्र की जननी वैशाली की चिंता कर रहे थे। यह सामान्य बात नहीं है। लोकतंत्र की जननी और ऐतिहासिक बने, उन्हें इसकी चिंता थी और उन्हें भरोसा था कि नीतीश कुमार उनके सपनों को पूरा करेंगे।

महामानव का मोल नहीं समझा गया
गमगीन माहौल में भी विपक्ष पर निशाना साधने से नहीं चूके मंत्री जय कुमार। उन्होंने कहा राजनीति में रिश्तों के निर्वहन का मानक बने रघुवंश बाबू ने जीवन के अंतिम समय में रिश्तों को तोड़ दिया। ऐसे कई मौके आए जब उनके दल ने उन्हें दरकिनार, उनके परामर्शों को अहमियत नहीं दी। राजनीति में होते हुए भी लाभ-हानि, ईर्ष्या-द्वेष से परे वे संत की तरह चले थे। बावजूद राजनीति के उन महान संत को अपमान का बोझ रिश्ते पर भारी पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिखे दो पत्र आने वाले समय में देश में बहस का विषय बनेंगे। उन्होंने जन्म तो क्षत्रिय कुल में लिया लेकिन वह हमेशा गरीबों, मजलूमों की चिंता की।

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