मोकामा में रोजगार का सवाल:घोसवरी में खेतों की सिंचाई के साथ फसलों की सुरक्षा बना चुनावी मुद्दा

मोकामाएक महीने पहलेलेखक: आलोक कुमार/बंटी कुमार
  • कॉपी लिंक
घोसवरी के सम्यागढ़ पंचायत के गांव में जाने का रास्ता। - Dainik Bhaskar
घोसवरी के सम्यागढ़ पंचायत के गांव में जाने का रास्ता।

दाल उत्पादन के साथ बाहुबलियों के वर्चस्व को लेकर अक्सर छिड़ने वाली जंग के लिए देश भर में चर्चित मोकामा टाल में अभी सिर्फ और सिर्फ चुनाव की चर्चा है। पंचायत चुनाव की वोटिंग शुरू होने में अब महज एक दिन का समय बचा है, सो अलग-अलग प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। बुधवार 8 दिसंबर को मोकामा के साथ घोसवरी प्रखंड में चुनाव होना है।

मतदाता विकास के सवाल पर गोलबंद हो रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है मोकामा और घोसवरी प्रखंड के पंचायतों का परिणाम क्या होने वाला है। मोकामा में बेरोजगारी बढ़ने से रोजगार की गारंटी और घोसवरी में टाल इलाके में खेतों की सिंचाई का सवाल बड़ा मुद्दा है।

शिवनार में मुखिया पद के लिए दो और मेकरा पंचायत में 16 प्रत्याशी है मैदान में

हथिदह, मरांची उत्तरी और मरांची दक्षिणी पंचायत की करीब आधी आबादी राजेंद्र सेतु पर भारी वाहनों के परिचालन बंद रहने, मैकडोवेल व बाटा जैसी कंपनियों के बंद होने से बेरोजगार हैं। ऐसे में इन पंचायतों में मतदाता रोजगार की गारंटी को लेकर प्रत्याशियों से सवाल पूछ रहे हैं।

शिवनार पंचायत में इस बार मुखिया पद के लिए केवल दो ही प्रत्याशी मैदान में हैं। दोनों एक-दूसरे के धूर विरोधी हैं, इसलिए यहां का मुकाबला बेहद दिलचस्प बन गया है। जबकि वोटरों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मेकरा पंचायत में निवर्तमान मुखिया समेत 16 मुखिया प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

दोनों जगह बड़े बदलाव की आहट - कन्हायपुर पंचायत में टाल की खेती बना मुद्दा

कन्हायपुर पंचायत में टाल की खेती व फसल की सुरक्षा का मुद्दा प्रत्याशियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। क्योंकि इस पंचायत के ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं। मोर पश्चिमी पंचायत में बाहरी व भीतरी की लड़ाई को हवा दिया जा रहा है। बरहपुर में सरकारी योजनाओं का हिसाब जनप्रतिनिधियों से मांगा जा रहा है। औंटा और दरियापुर पंचायत की चुनावी दंगल भी कमोवेश इसी तरह से अपने मुकाम पर पहुंचने वाली है।

दूसरी ओर रामपुर-डुमरा और नौरंगा जलालपुर में शिक्षा व स्वास्थ्य का मुद्दा हावी है। हथिदह, नौरंगा-जलालपुर, कन्हायपुर पंचायत के मतदाताओं में स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने को लेकर गुस्से का भाव दिखा। इधर औंटा पंचायत के लोगों ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र केवल टीकाकरण के लिए ही खुलता है। यही नहीं नल-जल की खराब स्थिति का मसला भी हर पंचायतों में है।

मोकामा के कसहा दियारा में बिजली तो पहुंच गई पर आवास योजना का लाभ नहीं मिला।
मोकामा के कसहा दियारा में बिजली तो पहुंच गई पर आवास योजना का लाभ नहीं मिला।

कसहा दियारा में आवास का मुद्दा सबसे बड़ा
कसहा दियारा के ग्रामीणों ने बताया कि इस पंचायत के रकबे को सरकारी घोषित कर दिया गया है। सरकारी जमीन बताकर आवास की स्वीकृति ही नहीं मिल पा रही है। निवर्तमान मुखिया के निधन के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। अब ऐसे जनप्रतिनिधि का चयन करेंगे, जो ग्रामीणों को आवास की स्वीकृति दिलाने में मददगार साबित हो सके।

वहीं हथिदह पंचायत के तीन और बरहपुर पंचायत के दो वार्डों में जलजमाव सबसे बड़ी समस्या है। वहां सालों भर नाले का पानी जमा रहता है। बरसात के दिनों में लोगों की मुश्किलें और ही बढ़ जाती है। इधर मोर पूर्वी और पश्चिमी पंचायत को जोड़ने वाली सड़क में भी जलनिकासी की व्यवस्था ध्वस्त है।

घोसवरी के पंचायतों में सिचाई की समस्या बड़ा मुद्दा
घोसवरी प्रखंड पंचायतों में चुनावी दंगल से बेफ्रिक किसान अपनी खेतीबारी में जुटे हैं। किसानों ने बताया कि उनके खेतों को समय से सिचाई चाहिए, इस पर चुनाव जीतने के बाद प्रतिनिधियों का ध्यान नहीं रहता। कुर्मीचक, सम्या, तारतर और कुम्हरा पंचायत में धान की खेती के बाद खेतों में चना लगाने की तैयारी चल रही है। वहीं घोसवरी, गोसाईं गांव, त्रिमुहान और पैजुना में भी अधिकांश लोग खेतों में दिखे। हालांकि खेतों में भी चुनावी चर्चा जोरों पर है।

किसान सबसे पहले जनप्रतिनिधियों से खेती की समस्या का निदान की उम्मीद टिकाए बैठे हैं। कुर्मीचक में पेयजल की भी समस्या है। वहीं दो तीन वार्डों में जलनिकासी की सुविधा नहीं होने से लोग परेशान हैं। सम्यागढ़ में अभी भी कई मुहल्ले के लोग कच्ची गलियों से होकर गुजर रहे हैं। कुम्हरा पंचायत में विकास कार्यों में बरती गयी अनियमितताओं को भी मुद्दा बनाया जा रहा है। गोसाईं पंचायत में धन और बाहुबल के प्रदर्शन को लेकर वोटरों ने चुप्पी साध ली है।