सर्दियों में बढ़ जाती है भूरा की मांग:झारखंड-UP से लेकर बंगाल तक सप्लाई, मकर संक्रांति पर है विशेष महत्व

नालंदाएक महीने पहले

नालंदा जिले का मुख्यालय बिहारशरीफ में इन दिनों भूरे के कारोबार में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मकर संक्रांति के पर्व में इसका खास महत्व है। सर्दियों में इसकी डिमांड काफी बढ़ जाती है। झारखंड, यूपी से लेकर पं. बंगाल तक भूरा की सप्लाई होती है। बिहारशरीफ में हर दिन अभी 4 से 5 क्विंटल भूरा का उत्पादन करीब 12 कारखानों में किया जा रहा है। 14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर सक्रांति पर्व पर भूरा का विशेष उपयोग होता है। लोग चूड़ा, दही, तिलकुट के साथ इसका भी स्वाद लेते हैं।

कारखाना में भूरा बनाते हुए कारीगर।
कारखाना में भूरा बनाते हुए कारीगर।

कैसे होता है तैयार

भूरा बनाने के लिए सबसे पहले गुड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। इसके बाद भट्टी पर इसे गलाया जाता है। गलाने के बाद जब यह पूरी तरह से प्लाज्मा अवस्था में आ जाता है। इसके बाद कड़ाही से बाहर जमीन पर ठंडा करने के लिए रखा जाता है, फिर भूरा अपने स्वरूप में आ जाता है।

कहां-कहां सप्लाई

बिहारशरीफ में बनने वाले भूरा की सप्लाई झारखंड, कलकत्ता सहित बिहार के कई जिलों में होती है। खासकर सर्दियों के मौसम में यह काफी डिमांड में रहती है। हालांकि, भूरे से जुड़े कारोबारी अब धीरे-धीरे इससे अपना पीछा छुड़ाते जा रहे हैं। कारण लागत अधिक और मुनाफा कम का बताया जा रहा है। वहीं, इसके कारीगर भी अब धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं।

बड़े कड़ाहे में भूरा को कारीगर तैयार करते हैं।
बड़े कड़ाहे में भूरा को कारीगर तैयार करते हैं।

क्या बोले कारोबारी

भूरा के कारोबार से जुड़े कारोबारी रवि माथुर ने बताया, 'यूपी और मध्य प्रदेश से मगही गुड को मंगाया जाता है, जिसको रूपांतरण कर भूरा तैयार किया जाता है। हालांकि अब इस व्यवसाय से लोग जुड़ना नहीं चाहते हैं क्योंकि लागत अधिक है और मुनाफा कम हो रहा है। वहीं, कारीगर भी अभी से दूरियां बना रहे हैं। सर्दियों के मौसम में बिहारशरीफ के कारीगर पटना जाकर भूरा बनाने का कार्य करते हैं जिससे उन्हें अच्छी मजदूरी मिल जाती है।'

40 साल से कारोबार

भूरा का कारोबार करीब 40 वर्षों से बिहार शरीफ में होता आ रहा है। पहले 25 कारखाने हुआ करती थी, जो अब एक दर्जन होकर रह गई है। जैसे-जैसे मकर संक्रांति के दिन नजदीक आते जाते हैं उत्पादन क्षमता भी बढ़ाया जाने लगता है। क्योंकि, मकर संक्रांति को ही लेकर इसकी खपत ज्यादा होती है। अभी 4 से 5 क्विंटल जहां उत्पादन हो रहा है तो वहीं 14 जनवरी के नजदीक आते आते 10 से 12 क्विंटल उत्पादन होने लगता है। 40 रुपये किलो होलसेल रेट है। वहीं, खुदरा 50 रुपये kg तक भूरा बिकता है।

रिपोर्ट: सूरज कुमार

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