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  • 16 Assembly Elections Were Held: 80 MLAs Were Formed From Five Assembly Constituencies, Still Drinking Water, Irrigation, Migration, Traffic, Education And Employment Are Big Questions.

भास्कर पड़ताल:विधानसभा के 16 चुनाव हुए: पांच विधानसभा क्षेत्र से 80 एमएलए बने, अब भी पेयजल, सिंचाई, पलायन, आवागमन, शिक्षा व रोजगार बड़ा सवाल

नवादा13 दिन पहले
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  • नवादा देश के आर्थिक रूप से पिछड़े जिले में शामिल, इस संकट से उबारने में नेताओं की कम दिखी दिलचस्पी

नवादा जिला आर्थिक दृृष्टिकोण से देश के पिछड़े जिले में शामिल रहा है। परंतु सुधार की गति धीमी है। आजादी के बाद से नवादा में विधानसभा के 16 चुनाव हुए। 80 लीडर एमएलए हो गए। एमपी, एमएलए निर्वाचित हुए। 2020 में विधानसभा की चुनाव प्रक्रिया चल रही है। उम्मीदवार वादे पर वादे कर रहे हैं। पर उनके वायदे का कितना भरोसा माना जाय, जनता के बीच अहम सवाल है। अपवाद को छोड़ दें तो अधिकांश लीडर अपनी आर्थिक हैसियत बढ़ाने में कार्यकाल पूरा कर लिए। लीडर्स की हालत सुधर गई, लेकिन जनता आज भी बुनियादी सवालों से जूझ रही है। यह किसी एक क्षेत्र और एक लीडर का सवाल नहीं है। यह पूरे नवादा की समस्या है। नागरिकों के सामने आज भी रोजी रोटी की समस्या है। रोजगार, पेयजल, शिक्षा, सिंचाई और बड़ा सवाल है।

आवागमन | आवाजाही की सुलभता भी आर्थिक उन्नति का जरिया बनता है। गांव और शहर दोनांे जगह आवाजाही की परेशानी है। नवादा शहर में ट्रैफिक की चरमराई व्यवस्था से लोग परेशान है। जबकि ग्रामीण इलाके में पुल और संपर्क पथों के कारण लोग कटे हैं। गोविंदपुर के सरकंडा पंचायत के ग्रामीणों को ब्लाॅक पहुंचने के लिए बरसात के दिनों में काफी दूरी तय करनी पड़ती है। दूसरी तरफ, फुलवरिया के उसपार बसे ग्रामीणों की हालत भी कुछ ऐसी ही है।

पेयजल
जिले का मेसकौर प्रखंड का इलाका पेयजल संकट में प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। बरसात के दिनों में भी पेयजल की संकट रहा है। पेयजल संकट के कारण कौआकोल के दर्जनों गांव गरमी के दिनों में खाली हो जाते है। लोग मवेशी लेकर तटीय इलाका में वास करते है। बारिश के बाद लोग लौटते हैं। यही नहीं, नवादा, रजौली, हिसुआ और वारिसलीगंज के दर्जनों गांव में पेयजल संकट से जूझते रहे हैं।

शिक्षा
अब देश और दुनिया में साइंस टेक्नोलाॅजी की शिक्षा पर जोर है, लेकिनजिले में बुनियादी तौर पर पीजी की पढ़ाई भी एक सपना जैसा है। जिले के किसी काॅलेज में पीजी की पढ़ाई नहीं होती। दूर दराज के इलाके में डिग्री की पढ़ाई भी मुश्किल है। नगर के केएलएस काॅलेज में पीजी की पढ़ाई होती था, लेकिन अब बंद हो गया है। इसके लिए प्रयास नही हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए परदेश पर निर्भर हैं।

सिंचाई
जिले की जीविका का मुख्य साधन खेती है। जिले की 79 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन सिंचाई की गंभीर समस्या रही है। लिहाजा, किसानों को अक्सर सुखाड़ का सामना करना पड़ता है। वैसे जिले में 131 राजकीय नलकूप है। लेकिन इनमें 100 से अधिक नलकूप बंद पड़े हैं। अपर सकरी जलाशय परियों की कथा जैसी है। नहरों और नालों का जीर्णोद्धार में किसानों के हितों की अनदेखी की जाती है।

रोजगार
स्थानीय स्तर पर रोजगार की व्यवस्था नहीं रहने से जिले में पलायन की गंभीर समस्या है। वारिसलीगंज में चीनी मील थी। वह तीन दशक से बंद है। हजारों लोगों की आमदनी छिन गई। रोजगार के नये अवसर भी नहीं सृृजन किए गए। लिहाजा, रोजी रोजगार के लिए लोगों को परदेस जाने की मजबूरी है। गरीब मजदूर तबके के लोग ईंट-भटठा पर जबकि शिक्षित युवक दूसरे राज्यों की फैक्ट्रियों में काम करने के लिए जाने को मजबूर हैं।

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