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राहत:20 दिन बाद हुई बारिश, अगले 15 दिन हर रोज 5-6 एमएम बारिश की जरूरत

नवादा7 दिन पहले
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  • लगातार चौथे साल मंडरा रहा था सुखाड़ का साया, बारिश के बिना जल रहे थे धान के पौधे

जिले में लगातार चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी के बाद मंगलवार को झमाझम बारिश हुई। करीब 15 दिन बाद हुई बारिश किसानों के लिए अमृत वर्षा के समान है। जिले में कहीं 1 घंटे तो कहीं 45 मिनट तक झमाझम बारिश हुई। बारिश के अभाव में जल रहे धान के पौधे को मंगलवार की बारिश से संजीवनी मिली है। इसके साथ ही लगातार चौथे साल सुखाड़ की आशंका से दहशतज़दा किसानों में भी नई उम्मीद जग गई है। मंगलवार की दोपहर से आसमान में बादल जाने के बाद से ही किसान लगातार आसमान की ओर नजरें गड़ाए थे। दोपहर बाद 3:30 बजे जब बारिश शुरू हुई तो किसानों के चेहरे खिल पड़े। बारिश के दौरान ही किसान खंती और कुदाल लेकर धान की क्यारियों में पानी जमा करने के लिए मेढ़ ठीक करने निकल पड़े।

किसानों ने बताया कि एकदम जरूरी मौके पर बारिश हुई है दो-चार दिन और बारिश नहीं होती तो गरीब किसानों की आधी धान की फसल मर जाती। अब इस बारिश के बाद कम से कम दो 4 दिनों के लिए राहत हो गई है। धान में बारिश क्या भाव में लग रहे कीड़े भी कुछ कम होंगे और पीली हो रही धान की फसल हरिया जाएगी। बारिश के बाद आज से किसान धान में यूरिया डालेंगे। किसके लिए आज से खाद की दुकानों पर किसानों की भीड़ भी बढ़ेगी।

मर रही धान की फसल को मिली संजीवनी, किसानों के लिए अमृतवर्षा

बिस्कोमान के पास यूरिया खत्म, बढ़ेगी किल्लत
बारिश होने के बाद भी किसान खेतों में आज भी खाद नहीं डाल पा रहे थे। किसानों के लिए खाद को लेकर भी समस्या कम नहीं है। जिले में खाद की किल्लत लगातार जारी है। बिस्कोमान के पास यूरिया खत्म हो चुका है। सिर्फ वारिसलीगंज में यूरिया बचा है। बिस्कोमान काउंटर के अलावा अन्य दुकानों में खाद का कोई अता पता नहीं है। जिसे जो मन में आ रहा है वह कर रहा है और खाद का मनमानी रेट वसूल रहा है। अब जब बारिश हो गई है तो काफी संख्या में किसानों को खाद की जरूरत है ऐसे में आज से यूरिया की किल्लत और बढ़ जाएगी।

बारिश नहीं होने के कारण अकाल की आहट से दहशत में थे किसान
सितंबर माह में बारिश नहीं होने के कारण जिले में लगातार चौथी बार अकाल का साया मंडराने लगा था। मॉनसून की बेरूखी के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। दूसरे राज्यों व अन्य जिलो में आई बाढ़ से जुड़ी खबरें नवादा में सूखे की भयावता के आगे बौनी साबित हो रही हैं। नवादा, हिसुआ, रोह, कौआकोल व मेसकौर के किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। धान पालने वाले मुख्य नक्षत्र निकले जा रहे हैं लेकिन खेतों में पानी नहीं है। पइन व नाले भी सूखे हुए हैं। नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है।

एक पखवारे बाद हुई बारिश से प्रखंड के किसानों में खुशी

वारिसलीगंज| प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार की दोपहर बाद हुई झमाझम बारिश से बिन पानी मुरझा रहे धान की फसल लहलहा उठी है। जिस कारण किसानों मुरझाए चेहरे खिल उठे हैं। नहरी क्षेत्र होने के बावजूद प्रखंड के 16 पंचायतों में से आठ नौ पंचायत के किसानों के खरीफ की फसलों को सिंचाई के लिए मानसून की वारिस पर निर्भरता है। सकरी नदी के पश्चिमी भाग में बसा सौर और बरनावा पंचायत की प्रायः सभी गांव में धान की फसलों की सिंचाई बारिस या फिर बैकल्पिक जल श्रोतों से होती है।

नहरी पानी से वंचित प्रखंड के मोसमा, दोसुत, शाहपुर, बाघी बरडीहा, ठेरा, मोहिउद्दीपुर पंचायत का कुछ भाग में बारिस की बूंदों से फसलों में जान आती है। पिछले एक पखवाड़े से आसमान में काले काले बादलों का झुंड सिर्फ उमड़ घुमड़ कर बिना बरसे लौट जाता था। फलतः जिस क्षेत्र में नहरी पानी की पहुंच नहीं थी वहां के किसानों की फसल में मुरझाने लगे थे जिस कारण किसानों में मायूसी छाई हुई थी। भगवान को खुश कर बारिस के लिए कई गांव में रामनामा यज्ञ तो कहीं हवन पूजा पाठ का दौर शुरू हो चुका था। मंगलवार की दोपहर बाद हुई बारिश से किसानों के चेहरे खिल गए हैं।

बिस्कोमान काउंटर पर शुक्रवार से मिलेगा यूरिया
सिर्फ वारसलीगंज में थोड़ा यूरिया बचा है और बाकी सभी जगह यूरिया खत्म हो चुका है। किसानों को फिलहाल 2 दिन यूरिया नहीं मिल पाएगा। बुधवार को गया में यूरिया की रैक लगेगी और यह गुरुवार को नवादा पहुंचेगी। 225 एमटी यूरिया मंगाया जा रहा है। शुक्रवार से नवादा, रजौली व वारसलीगंज के बिस्कोमान काउंटर पर किसानों के लिए यूरिया उपलब्ध हो जाएगा।
विक्की कुमार, बिस्कोमान के क्षेत्रीय अधिकारी

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