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मौसम:7 मई तक छाए रह सकते हैं बादल, सतर्कता बरतें किसान

नवादाएक दिन पहले
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  • खरीफ फसल को जैविक खाद देने के लिए खेत में लगाएं ढैचा की फसल, आम, मूंग और जेठुआ सब्जी को बचाने के लिए करें उपाय

2 दिन तक आंधी और हल्की बारिश के बाद मंगलवार को मौसम थोड़ा साफ रहा और जिले में कहीं भी आंधी पानी आने की शिकायत नहीं है। हालांकि अभी अगले 7 मई तक मौसम के खराब रहने के पूर्वानुमान हैं। कृषि विज्ञान केंद्र ने एडवाइजरी जारी कर किसानों को सचेत किया है। जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि 5 मई को बादल छाए रहेंगे तथा 6 और 7 मई को भी आंशिक बादल छाने की संभावना है। इसके चलते कहीं बूंदाबांदी हो सकती है। लिहाजा किसान सतर्क रहें और रवि फसल के थे सिंह के बाद अनाज के भंडारण में सतर्कता बरतें।

कृषि मौसम वैज्ञानिक रोशन कुमार ने बताया रबी फसल की कटाई और थ्रेसिंग हो चुकी है और खरीफ फसल की तैयारी शुरू करने का वक्त आ गया है। खरीफ फसल के लिए जैविक खाद बनाने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। इसके लिए किसान ढैचा की खेती करें। 1 एकड़ में इसके 15 से 16 किलो बीज काफी है। अगले एक डेढ़ महीने में या तैयार हो जाएगा और धान की फसल को जबरदस्त उर्वरा शक्ति देगा। अभी खरीफ फसल के लिए मिट्टी को तैयार करने यानि उर्वर बनाने का समय है। 20 मई के बाद धान का बिचड़ा लगा सकते हैं।

मिट्टी और मवेशी की देखभाल जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ रंजन कुमार और रोशन कुमार ने बताया कि रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो ं की गहरी जुताई कर खेत को खुला छोड़ दें ताकि सुर्य की तेज धुप मिट्टी में छिपे कीड़े के अण्डे, प्युपा एवं घास के बीजों को नष्ट कर दें । दुधारू पशु को धुप व लू से बचान े के लिए पशुओं को छायेदार स्थान पर रखे एवं शुद्ध पानी पीने के लिए दिन में 3 से 4 बार दें ।

मूंग में मिथाइल पैराथियान का छिड़काव
पिछले माह में बोयी गई मनग व उड़द की फसलों मे निकाई-गुराई करे। इन फसलों में सघन रोमोवाली सुंडिया की निगरानी करें। यह पौधों के कोमल भागो विषेषकर पत्तियो को खाती है। इस प्रकार इस कीट से फसल को काफी नुकसान एवं उपज में काफी कमी आती है। रोक-थाम हेतु फसल में मिथाइल पैराथियान 50 ई0सी0 दवा का 2 मि0ली0/लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल में छिडकाव करें।

सब्जियों का ऐसे करें बचाव
भिण्डी में फल एवं प्ररोह वेधक कीट इसके फूल एवं फल को नुकसान पहुचाती है। इस कीट से बचाव के लिए सर्वप्रथम क्षतिग्रस्त पौधे के भागो व आक्रांत फल को तोड़कर खेत से अलग कर दें। इसके बाद मैलाथियान 50 ईसी दवा का 1 मिली या डाइम थोएट 30 ईसी का 1.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। लत्तर वाली सब्जियों जैसे नेनुआ, करैला, लौकी व खीरा में लाल भृंग कीट की निगरानी करे। बचाव के लिए डाइक्लोरवांस 76 ईसी का एक मिली प्रति ली पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

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