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कुव्यवस्था:हिसुआ और नारदीगंज में फूटा किसानों का गुस्सा, नेशनल हाईवे जाम कर किया प्रदर्शन

नवादा18 दिन पहले
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खाद के लिए किसानों ने सड़क जाम कर किया हंगामा। - Dainik Bhaskar
खाद के लिए किसानों ने सड़क जाम कर किया हंगामा।
  • लहलहाते धान को लगी यूरिया पर जमाखोरों की नजर, सहकारी समितियों में एक बोरी भी यूरिया नहीं

कई साल बाद जिले में शत-प्रतिशत रोपनी हुई है लेकिन रोपनी पूरी होने के बाद किसानों को फसल बचाना मुश्किल दिख रहा है। जिले की सहकारी समितियों के पास खाद का स्टॉक खत्म हो गया है तो निजी दुकानों पर यूरिया डेढ़ गुना दाम में भी नहीं मिल रहा है। रविवार को सदर प्रखंड में यूरिया के लिए सड़क जाम के बाद सोमवार को जिले के कई हिस्से में बवाल हुआ। सुबह में जिलेभर की खाद दुकानों में लंबी लंबी लाइन लग गई। हिसुआ और नारदीगंज में हंगामा भी हुआ। नारदीगंज में अचानक खाद की बिक्री रोक देने के बाद किसान आक्रोशित हो गए और नेशनल हाईवे 82 को जाम कर दिया। किसानों ने उचित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग करते हुए जमकर बवाल काटा।

हिसुआ में भी विश्व शांति चौक पर खाद को लेकर जमकर हंगामा हुआ। हंगामा इतना बढ़ा कि पुलिस को बुलाना पड़ा। कड़ी मशक्कत के बाद मामला शांत हुआ। दर-दर की ठोकर खा रहे किसान : किसान परेशान है और यूरिया के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। मजबूरी में किसान महंगे दाम में खाद खरीदने को मजबूर है। अब महंगे दाम में भी खाद नहीं मिल रहा है। नरहट प्रखंड के किसान दीपक सिंह ने बताया कि 2 दिनों से खाद के लिए हिसुआ नवादा शहर में चक्कर काट रहे हैं लेकिन यूरिया नहीं मिल रहा है। मजबूरी में हम खाद का डेढ़ गुना दान देने को तैयार हैं फिर भी नहीं मिल रहा है।

निजी दुकानों में 400 रुपए में भी मिलना मुश्किल, अल सुबह से बैठे किसान बिना उर्वरक लिए लौटे तो उनमें बढ़ा आक्रोश

अधिकतर पैक्सों ने यूरिया का उठाव नहीं किया
किसानों को यूरिया मुहैया कराने के लिए पंचायत सहकारी समितियों को खाद उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन जिले की अधिकतर पैक्सों ने यूरिया का उठाव नहीं किया है। बिस्कोमान में भी पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं आता। नारदीगंज में हंगामा कर रहे किसान नरेश यादव, दीपू चौहान आदि ने बताया कि हम लोग परेशान हैं। कहीं 400 कहीं साडे 400 में यूरिया मिल रहा है। क्या करें मजबूरी में खरीीदना ही पड़ेगा। इसी तरह हर दिन हजारों किसान जिले में यूरिया के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। यूरिया नहीं मिलने के कारण धान की फसल खराब हो रही है।

तीन सप्ताह बाद आया उर्वरक, लेकिन बिस्कोमान से मात्र 70 किसानों को मिल सका उर्वरक
वारिसलीगंज| धान रोपनी के बाद से ही बाजार और बिस्कोमान में खाद की किल्लत के कारण किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। रैक आने में देर होने को लेकर किसानों की मांग को पूरी करने के लिए सड़क मार्ग से लगभग दो हजार बोरी उर्वरक मंगाई गई है । जिसका वितरण रविवार से की जा रही है तो सोमवार को बिस्कोमान भवन में भी खाद की वितरण शुरू की गई। लेकिन मात्र 70 किसानों को ही खाद उपलब्ध हो पाई। जिस कारण सैकड़ों किसान बिना खाद लिए वापस घर लौट गए।

बता दें कि एक माह से बिस्कोमान को बहुत कम खाद उपलब्ध कराई जा रही है।सड़क मार्ग से मंगाए गए उर्वरक में 1400 बोरी यूरिया बिस्कोमान को बांटने के लिए दिया गया है। लेकिन प्रथम दिन मात्र कुछ किसानों को ही उर्वरक प्राप्त हो सका। बता दें कि क्षेत्र केेे किसानों को बिस्कोमान में खाद बटने की सूचना मिलते ही सुबह 4 बजे से ही किसानों की लाइन बिस्कोमान के सामने लग गई थी। यूरिया खाद बांटने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन सरवर डाउन रहने और पॉश मशीन पर अंगूठा लगानेेेे के कारण मात्र 70 किसानों को ही एक बोरा उर्वरक उपलब्ध कराई गई। ​​​​​​​

क्यों बिगड़े हालात
दरअसल, जिले में सहकारी समितियों के जरिए इफको का यूरिया बेचा जाता है। युवकों का यूरिया बिस्कोमान के चार काउंटर के अलावा कुछ सहकारी समितियां और पैक्सों को बेचने की अनुमति है। लेकिन अधिकतर पैक्स यूरिया का उठाव नहीं करते लिहाजा बिस्कोमान के चार काउंटर समेत गिने चुने स्थानों पर ही इफको का यूरिया मिलता है। करीब एक महीना पहले इफको यूरिया की खेत आई थी जो खत्म हो चुकी है। अब इन सहकारी समितियों के पास एक बोरी यूरिया नहींं बचा है। हर जगह यूरिया खाद उपलब्ध नहीं है का बोर्ड टंगा है।
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