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राहत:आधा सितंबर बीता लेकिन 96 एमएम की जगह सिर्फ 36 एमएम हुई औसत बारिश

नवादा13 दिन पहले
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झमाझम बारिश से खेतों में लहलाते धान की फसल। - Dainik Bhaskar
झमाझम बारिश से खेतों में लहलाते धान की फसल।
  • जलाने वाली गर्मी के बाद हुई झमाझम बारिश, धान की फसल में आयी नई जान, किसानों के लिए अमृतवर्षा शुरू

धान की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण सितंबर माह आधा बीत चुका है लेकिन सामान्य से 70 % कम बारिश हुई है। 14 अगस्त तक करीब 95 एमएम बारिश होनी थी लेकिन सिर्फ 35 एमएम ही बारिश हो पाई। हालांकि मंगलवार की सुबह से मौसम का मिजाज बदला है। साथ ही जिले में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जिले में अभी लगातार बारिश की संभावना है। चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी के बाद मंगलवार को झमाझम बारिश ने किसानों को राहत दी है। कहीं अहले सुबह में हीं झमाझम बारिश हुई तो कहीं दोपहर में बारिश की बौछार हुई। कई दिनों से पड़ रही जलाने वाली गर्मी के बाद हुई झमाझम बारिश किसानों के लिए अमृत वर्षा साबित हुई है। जिले में कहीं 1 घंटे तो कहीं 45 मिनट तक झमाझम बारिश हुई। बारिश के अभाव में जल रहे धान के पौधे को मंगलवार की बारिश के संजीवनी मिली है। इसके साथ ही सुखाड़ की आशंका से दहशतज़दा किसानों में भी नई उम्मीद जग गई है।

तेज धूप की वजह से खेतों में झुलसने लगी थी फासल

जुलाई में तो अच्छी बारिश हुई थी लेकिन मध्य अगस्त के बाद बहुत कम बारिश हो रही है। सितंबर माह में भी बारिश नहीं होने के कारण जिले में अकाल का साया मंडराने लगा था। मॉनसून की बेरूखी के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। दूसरे राज्यों व अन्य जिलो में आई बाढ़ से जुड़ी खबरें नवादा में सूखे की भयावता के आगे बौनी साबित हो रही थी। नवादा, हिसुआ, रोह, कौवाकोल व मेसकौर के किसानों में हाहाकार मचा हुआ था। धान पालने वाले मुख्य नक्षत्र निकले जा रहे हैं लेकिन खेतों में पानी नहीं है। अब इन किसानों को राहत मिली है।

बारिश होने से धान में लगे कीड़े भी कम होंगे, यूरिया के लिए यह उपयुक्त समय

ऐसे तो 3 दिनों से कभी कभी बादल मंडरा रहे थे लेकिन बारिश के जगह भीषण उमस भरी गर्मी ही पड़ रही थी। मंगलवार की सुबह से मौसम मिजाज बदला और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश शुरू हुई तो किसानों के चेहरे खिल पड़े। बारिश के दौरान ही किसान खंती और कुदाल लेकर धान की क्यारियों में पानी जमा करने के लिए मेढ़ ठीक करने निकल पड़े। किसानों ने बताया कि एकदम जरूरी मौके पर बारिश हुई है दो-चार दिन और बारिश नहीं होती तो गरीब किसानों की आधी धान की फसल मर जाती। अब इस बारिश के बाद कम से कम दो 4 दिनों के लिए राहत हो गई है। धान में बारिश क्या भाव में लग रहे कीड़े भी कुछ कम होंगे और पीली हो रही धान की फसल हरिया जाएगी।

झमाझम बारिश से शहर से लेकर गांवों की सड़कों में जलजमाव

मंगलवार को नगर व प्रखंड के विभिन्न हिस्सों में झमाझम बारिश हुई जिससे जहां किसानों के चेहरे खिल उठे हैं वहीं आम शहरी लोग व राहगीरों को सडकों पर कीचड़मय हो जाने से परेशानी महसूस कर रहा है। इधर बारिश होने से गर्मी से भी राहत महसूस हुई है। किसानों की मानें तो ये बारिश धान की फसल के लिए बेहद लाभदायक है। लेकिन शहरी है कि उसे जलजमाव, बिजली की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। किसान मोसाफिर कुशवाहा, दिनेश महतों, दानी राजवंशी, लालो सिंह, धर्मेंद्र कुमार आदी किसानों ने बताया कि इन दिनों खेतों में लगी हुई धान के पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं।

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