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देशव्यापी हड़ताल:सैकड़ों दफ्तरों में लगे ताले, 120 बैंकों में काम ठप, 60 करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित

नवादा2 महीने पहले
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  • हड़ताल में बैंक, डाकघर, आंगनबाड़ी के कर्मचारी ने शहर में प्रदर्शन कर नारेबाजी की

सरकार की अर्थिक नीतियों और निजीकरण के खिलाफ देश भर के ट्रेड यूनियनों के द्वारा बुलाए गए देशव्यापी हड़ताल का जिले में व्यापक असर देखने को मिला। गुरुवार को कई कर्मचारी संगठनों से जुड़े हजारों कर्मचारी हड़ताल पर रहे और जिले के सैकड़ों कार्यालयों में काम काज ठप हो गया। सबसे ज्यादा प्रभाव बैंकों के काम काज पर पड़ा। स्टेट बैंक की कुछ शाखाओं को छोड़कर बाकि के करीब सभी बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बंद रहा। आॅल इंडिया बैंकर्स इम्पलाई एसोसिएशन (एआईबीईए) और आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ( एआईबीओए) के बैनर तले जिले भर के बैंकरों ने रोषपूर्ण प्रदर्शन किया। बैंकर्स कोआर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में बैंकरों ने शहर में घूम-घूम कर शाखाओं को बंद कराया और एकजुटता का परिचय देते हुए सभी बंद पड़े शाखाओं के पास बंद ताले के साथ सेल्फी ली। इसके अलावे डाकघर, आदि के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहें। कर्मचारियों ने पुराना पेंशन नीति लागू करो, वेतन वृद्धि समझौता लागू करना होगा, बैंकों का मर्जर बंद करों, बैंकों का निजीकरण नहीं सहेंगे, आवाज दो हम एक है, अपनी मांगे लगड़कर लेंगे, इन क्लाब जिंदाबाद जैसे नारे लगाकर प्रदर्शन किया।

100 से अधिक बैंक शाखाओं में लटके ताले
ट्रेड यूनियन के हड़ताल के कारण जिले के अधिकांश बैंक शाखाओं में ताले लटक गए। बैंक कर्मचारियों के हड़ताल से जिले की अर्थव्यस्था बेपटरी हो गई। लोगों को कैश डेबिट और क्रेडिट के लिए भटकना पड़ा। कर्मियों ने शाखाओं को बंद रखा और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। राष्ट्रव्यापी हड़ताल में काॅमर्शियल बैंक, ग्रामीण बैंक सहित बीमा कर्मियों और डाककर्मियों ने भाग लिया । बैंकों में हड़ताल के कारण करीब 60 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ ।

सरकार की नीतियों का किया विरोध
बैंकर्स कोआर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों का विस्तार व्यापक रूप से हुआ एवं लाभप्रद में भी बढ़ोतरी हुई लेकिन इस पर प्राइवेट सेक्टर की नजर लग गई । ऐसे में रिजर्व बैंक की स्वायत्तता तक खतरे में पड़ गई प्रतीत होता है । देश की अर्थव्यस्था को दुरूस्त रखने के लिए हमलोग ड्युटी से ज्यादा काम करते हैं लेकिन सरकार हमारे हितों को नजरंदाज करती है। बैंकों का मर्जर और निजीकरण करके बैंकरों को अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है।

मांगे गिनाकर की नारेबाजी
बैंक कर्मियों ने मांगे गिनाते हुए बैंकों की निजीकरण बंद करने, एनपीएस को खत्म कर नियमित पेंशन लागू करने, सहकारी व ग्रामीण बैंको को मजबूत करने, नई नियुक्ति करने, क्रॉस सेलिंग को बंद करने, पेंशन के साथ डीए बढ़ाने, आउटसोर्सिंग बंद करने, तथा बैंक के दैनिक भोगी कर्मियों को नियमित करने की मांग करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से करन राज, दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक से गोपाल कृष्ण झा, कुंदन कुमार बिनोद कुमार सिंह, शशि शेखर सिंह, दिलीप कुमार, अशोक कुमार, परमेश्वर चौधरी, प्रमोद प्रसाद सिंह, पीएनबी से पंकज कुमार, धर्म प्रसाद आदि बैंक कर्मी शामिल थे।

आंगनबाड़ी सेविकाओं ने दिया हड़ताल को समर्थन
नवादा| गुरुवार को ट्रेड यूनियन के आह्वान पर हुए कर्मचारियों के हड़ताल को जिले की आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भी समर्थन दिया। जिले भर के सभी 14 परियोजनाओं की हजारों आंगनबाड़ी सेविकाओं ने मांगों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद किया। बिहार राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ के जिला अध्यक्ष विजय प्रसाद सिंह ने कहा कि सरकार के कर्मचारी विरोधी रवैया से देशभर के कर्मचारी परेशान हैं। इसलिए जिले भर की आंगनवाड़ी सेविका सहायिका ने इस आंदोलन का समर्थन किया है।

बैंकों कर्मचारियों की हड़ताल से ग्राहकों को हुई परेशानी
बैंको में हड़ताल के कारण गुरुवार को नरहट प्रखंड के ग्राहकों को काफी हुई। जानकारी नहीं रहने के कारण गुरुवार को काफी संख्या मेंं ग्राहक बैंक आए थे। बैंक बंद रहने के कारण उन्हें घर वापस लौटना पडा। बताया जाता है कि 26 नवंबर को कुल 10 बैंक यूनियन ने हड़ताल बुलाई थी । इसके कारण व्यवसायियों की जहां कारोबार प्रभावित हुआ है वह आम ग्राहकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लोग हिसुआ गए तो वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

ट्रेड यूनियन के आह्वान पर 337 डाकघरों में लटका रहा ताला

नवादा | ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए देशव्यापी हड़ताल और प्रदर्शन में जिले के डाककर्मी भी शामिल हुए और कामकाज को पूरी तरह ठप रखा। नई पेंशन नीति को समाप्त कर पुरानी पेंशन नीति लागू करने सहित अन्य मांगों को लेकर कर्मचारियों ने जबरदस्त नारेबाजी की और गेट के पास धरने पर बैठ गए। खजांची मुकुल कुमार खजांची ने कहा कि सरकार की नीतियों के खिलाफ यह पहला बड़ा कदम है। इस मौके पर प्रमंडलीय सचिव जितेंद्र कुमार, अभय शंकर सुमन, रंजन कुमार, राजेश कुमार, संतोष कुमार, मुकुल कुमार, गौरी कुमार, सोनू कुमार, अभिषेक कुमार, मणिकांत कुमार, विनय कुमार मिश्रा आदि ने कमलेश चंद्र की सिफारिशों को लागू करने, सभी दैनिक एवं ठेकेदारी प्रथा के तहत बाल मजदूरों का स्थायीकरण करने, छटनी कटौती को अविलंब बंद करने आदि मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद किया।

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